अनुभूति कलश

अहसासों को संजोया है मैंने, अनुभूतियों को पिरोया है मैंने, बने सत्य,शिव, सुन्दरम यह कलश, मानस की गंगा में धोया है मैंने..

kuch apne baare me

कुछ अपने  बारे
में………

   मैं डा रमा द्विवेदी
हूं।बीस वर्षों के
हिन्दी अध्यापन के
उपरान्त            मैंने
आकसिमक अवकाश  ले
लिया है।स्वतंत्र
लेखन में कविता
,कहानी, लेख ,निबन्ध
शोध-पत्र आदि में
विशेष रुचि है एवं
साहित्यिक पत्रिका
“पुष्पक” कादमिबनी
क्लब, हैदराबाद  की
संपादक हूं।गीत -
संगीत मुझे बहुत
प्रिय हैं।नारियों
की दयनीय  सिथति के
प्रति विशेष
संवेदनशील हूं। अपनी
कविताओं के माध्यम से
उनमें जागरुकता लाना
चाहती हूं ऒर समाज के
लोगों का ध्यान उनकी
समस्याओं की ऒर खीचना
चाहती हूं।ताकि उनको
भी स्वतंत्र पहचान
एवं उडान भरने के लिए
खुला आसमान मिल सके
।बस यही मेरे जीवन का
लक्ष्य है ।मेरी
अधिकतर कविताओं
मेंयही भावना
परिलक्षित होती
है।वैसे मैं वर्षों
से लिखती रही हूं
लेकिन  एक ही पुस्तक
“दे दो आकाश” काव्य
संग्रह सितम्बर २००५
में प्रकाशित हुई
है।बस इतना ही बाकी
आप कविताओं को पढ.कर
स्वयं समझ सकेगे………..

 

June 27, 2006 - Posted by ramadwivedi | सृजन के प्रिय क्षण | | No Comments

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  1. डॉ रमा जी,
    आपका हार्दिक स्वागत है, मैं भी फ़िलहाल हैदराबाद मैं ही रहता हुँ, आप की कवितायें बहुत अच्छी लगी, कृपया कादम्बिनी के बारे में विस्तृत जानकारी देवें।

    Comment by सागर चन्द नाहर | July 4, 2006

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