अनुभूति कलश

अहसासों को संजोया है मैंने, अनुभूतियों को पिरोया है मैंने, बने सत्य,शिव, सुन्दरम यह कलश, मानस की गंगा में धोया है मैंने..

अगर प्यार के ये झरोखे न होते

दा ने अगर दिल मिलाये न होते
तो तुम तुम न होते हम हम न होते|

न यह हिम पिघलता न नदियां ये बहती
न नदियां मचलती न सागर में मिलती।
सागर की बाहों में गर समाये न होते
तो तुम तुम न होते हम हम न होते |

न साग्र यह तपता न बादल ये बनते
न बादल पिघलते न जलकण बरसते
जलकण धरा मे गर समाये न होते
तो तुम तुम न होते हम हम न होते |

न रितुयें बदलती न ये फूल खिलते
न तितली बहकती naभौरे मचलते
अगर प्यार के ये झरोखे न होते
तो तुम तुम न होते हम हम न होते

खुदा ने अगर दिल मिलाये न होते
तो तुम तुम न होते हम हम न होते |

डा. रमा द्विवेदी

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June 29, 2006 - Posted by ramadwivedi | गीत | | No Comments

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