होली गीत
आई है रंगों की बहार,
गोरी होली खेलन चली।ललिता भी खेले,विशाखा भी खेले,
संग में खेले नंदलाल ….गोरी होली।लाल-गुलाल वे मल-मल लगावै,
धोवत होवैं लाल-लाल….गोरी होली।रूठी राधिका को श्याम मनावे,
प्रेम में हुए हैं निहाल…गोरी होली।सब रंगों में प्रेम रंग सांचा,
लागत,जियरा मारै उछाल…गोरी होली।होली खेलत वे ऐसे मगन भईं,
मनुंआ में रहा न मलाल…गोरी होली.।तन भी भीग गयो,मन भी भीग गयो,
भीगा है सोलह श्रिंगार…गोरी होली।इसको सतावैं ,उसको मनावैं,
कान्हा की देखो यह चाल…..गोरी होली।कैसे बताऊं मैं कैसे छुपाऊं,
रंगों ने किया है जो हाल….गोरी होली।आओ मिल के प्रेम बरसाएं,
अंबर तक उड़े गुलाल…गोरी होली।सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं
डा. रमा द्विवेदी
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रमा जी
संगीतकारों और संगीत-प्रेमियों के लिए तो अनुपम गीत है। पढ़ते पढ़ते गीत
अनायास ही स्वर-बद्ध हो जाता है।
इन पंक्तियों में रंग-साम्य के कारण रोचक बन गई हैं:-
लाल-गुलाल वे मल-मल लगावै,
धोवत होवैं लाल-लाल….
आनंद आ गया इस गीत को पढ़ कर!
महावीर
आदरणीय शर्मा जी,
सादर नमन!
आपको होली गीत पसन्द आया बस यही मेरी प्रेरणा है….दिल से आभारी हूं….सादर…
रमा द्विवेदी