अनुभूति कलश

अहसासों को संजोया है मैंने, अनुभूतियों को पिरोया है मैंने, बने सत्य,शिव, सुन्दरम यह कलश, मानस की गंगा में धोया है मैंने..

दर्द का इलाज दर्द

           कौन किसके दर्द में कोई रोता है?
          आदमी अपना दर्द खुद ही ढ़ोता है॥

            वे आए हाल पूछने औपचारिकता वश।
            बस इसके बाद उनका अता-पता न होता है॥

            हंसने वाले के साथ सभी हंसते हैं ।
            रोने के लिए किसका जिगर बड़ा होता है?

            न रखो जमाने से हमदर्दी की उम्मीद कोई।
           क्योंकि जमाना सदा ही बेदर्द होता है ॥

            अगर मिटाना हो दर्द  तो एक दर्द और ले लो।
            हर दर्द का इलाज बस यही होता है ॥

            पियो दर्द को और पियो जीभर कर ।
            इस प्रसव के बाद ही तो सृजन होता है ॥

            न फैलाओ कभी मदद के लिए हाथ रमा।
            खुद की ही शक्ति का संबल  बड़ा होता है॥

              डा. रमा द्विवेदी

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March 9, 2007 - Posted by ramadwivedi | गीत | | No Comments

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