दहलीज
दहलीज चित्र -१
बेटियों के लिए
एक दहलीज से,
दूसरे दहलीज तक का,
फासला तै करने में,
सदियां बीत जाती हैं,
उस दहलीज को अपना बनाने में
और सच तो यह है कि,
ज़िन्दगी बेमानी सी लगती है
क्योंकि कभी-कभी-
हम उस दहलीज के बन भी नहीं पाते??
दहलीज चित्र -२
दहलीज एक गतिरोध भर नहीं,
यह पहचान है /उस घर की सीमाओं की,
मर्यादाओं की /संस्कारों की,
सुरक्षा की /आत्मीयता की,
यह वरदान भी है,गुमान भी है,
और कभी -कभी अभिशाप भी??दहलीज चित्र-३
आधुनिक घरों में ,
नहीं रही दहलीज की परम्परा,
इसलिए न कोई मर्यादाएं हैं ,
न जीवन आचरण के मूल्य,
और नई पीढ़ी दिग्भ्रमित हो,
भटक रही है,
मूल्यहीनता की दिशा में॥दहलीज चित्र-४
अच्छी थी दहलीज की परम्परा,
मर्यादा में बंधी बनिताएं,
सुरक्षित तो थीं।
जब-जब दहलीज का उलंघन हुआ,
परिणाम भयंकर हुए,
काश! सीता ने,
‘लक्ष्मण रेखा’ रूपी दहलीज को,
न लांघा होता तो?
राम-रावण युद्ध न होता,
और स्वयं सीता को,
अग्नि-परीक्षा न देनी पड़ती,
और अपने ही प्रिय से,
उन्हें वनवास भी न मिलता॥डा. रमा द्विवेदी
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