क्षणिकाएं

१- संबंधों में दूर तक पसरता,
     स्नेहहीनता  का,
     बेशुमार मरूस्थल,
     स्नेह की तलाश में,
     छटपटाता आदमी,
     तपती रेत पर एक बूंद सा,
     सूख गया है ।

 २- मरूस्थल बने संबंध सब,
     आत्मीयता -स्नेह की निर्झरिणी
     सूख गई है,
     स्नेहहीन रिश्ते,
     छ्टपटा रहे हैं,
     तपती रेत पर,
     एक बूंद स्नेह के खातिर।

        डा. रमा द्विवेदी

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Published in: on April 3, 2007 at 4:41 am Leave a Comment

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