१- संबंधों में दूर तक पसरता,
स्नेहहीनता का,
बेशुमार मरूस्थल,
स्नेह की तलाश में,
छटपटाता आदमी,
तपती रेत पर एक बूंद सा,
सूख गया है ।२- मरूस्थल बने संबंध सब,
आत्मीयता -स्नेह की निर्झरिणी
सूख गई है,
स्नेहहीन रिश्ते,
छ्टपटा रहे हैं,
तपती रेत पर,
एक बूंद स्नेह के खातिर।डा. रमा द्विवेदी
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क्षणिकाएं
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