१- आधुनिकता
नीलामी रिश्तों की
खुली दुकान।२- बुरा करम
खुशहाल जीवन
मन का भ्रम ।३- सुन्दर तन
कनक घट विष
मलिन मन ।४- स्वारथ वश
मुखौटा याराना का
कटु सच्चाई ।५- कविता पढ़ी
कछु पल्ले न पड़ी
जनता हंसी ।६- शादी रचा ली
माडर्न समझौता
खतरे भरी ।७- कैसी बेढंग
ज़िन्दगी की कहानी
मृत्यु रंगीन ।८- जीवन दुखी
मनाते हैं जश्न
मृत्यु पर्यन्त ।९- कुंडली मिली
शहनाई की गूंज
करम जली ।१०- उघड़ा तन
आधुनिक फ़ैशन
यश की सीढ़ी ।११- बेढ़ंगी बात
बेवजह की हंसी
अजीब बात ।डा. रमा द्विवेदी
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कुछ हाइकु
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सबसे बढ़िया-
नीलामी रिश्तों की
खुली दुकान।
हाईकु अच्छे हैं!
रचनायें प्रभावित करती हैं अच्छी विधा है. मन करता है खुद भी कुछ लिखा जाये.
धन्यवाद.
शैलेश जी, समीर जी, एवं पांडे जी,
आप सबको हाईकु पसन्द आए मेरा एक नवप्रयास सार्थक हो गया…..आभारसहित…
डा. रमा द्विवेदी
Rama Ji,
Aap ka prayaas bahut sarahneeye hai