कुछ हाइकु
April 13, 2007 at 2:25 pm (हाइकु)
१- आधुनिकता
नीलामी रिश्तों की
खुली दुकान।२- बुरा करम
खुशहाल जीवन
मन का भ्रम ।३- सुन्दर तन
कनक घट विष
मलिन मन ।४- स्वारथ वश
मुखौटा याराना का
कटु सच्चाई ।५- कविता पढ़ी
कछु पल्ले न पड़ी
जनता हंसी ।६- शादी रचा ली
माडर्न समझौता
खतरे भरी ।७- कैसी बेढंग
ज़िन्दगी की कहानी
म्रित्यु रंगीन ।८- जीवन दुखी
मनाते हैं जश्न
म्रित्यु पर्यन्त ।९- कुंडली मिली
शहनाई की गूंज
करम जली ।१०- उघड़ा तन
आधुनिक फ़ैशन
यश की सीढ़ी ।११- बेढ़ंगी बात
बेवजह की हंसी
अजीब बात ।डा. रमा द्विवेदी
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शैलेश भारतवासी said,
April 13, 2007 at 5:54 pm
सबसे बढ़िया-
नीलामी रिश्तों की
खुली दुकान।
समीर लाल said,
April 13, 2007 at 6:14 pm
हाईकु अच्छे हैं!
Gyandutt Pandey said,
April 14, 2007 at 2:28 am
रचनायें प्रभावित करती हैं अच्छी विधा है. मन करता है खुद भी कुछ लिखा जाये.
धन्यवाद.
ramadwivedi said,
April 14, 2007 at 5:07 am
शैलेश जी, समीर जी, एवं पांडे जी,
आप सबको हाईकु पसन्द आए मेरा एक नवप्रयास सार्थक हो गया…..आभारसहित…
डा. रमा द्विवेदी
Mohinder Kumar said,
April 14, 2007 at 12:05 pm
Rama Ji,
Aap ka prayaas bahut sarahneeye hai