‘क्लोन’ बेबी “ईव” जबसे आया है,
सारी दुनिया में तहलका मचाया है।
उपलब्धि अच्छी है अगर सही इस्तेमाल हो,
परन्तु मानव के गुण-रूप पर प्रश्न चिह्न लगाया है।
इस भागम-भाग की ज़िन्दगी में,
मानव का एक शरीर कम पड़ता है,
अत: वो अपने “क्लोन” तैयार करायेगा,
और फिर अपना हमशक्ल तैयार करायेगा।
फिर न कोई असली होगा,
और न कोई नकली होगा,
क्योंकि वो असली का ही,
हूबहू हमशक्ल होगा।
“क्लोन” के कई फायदे हैं,
किन्तु उसके कुछ कायदे हैं,
जिसका “क्लोने” पैदा होगा,
असली का मूल्य कम होगा।
कभी वो असली,कभी लगेगा नकली,
उसे देखकर खुद को भूल बैठोगे आप,
और खुद को देखकर कह उठोगे,
कहीं मैं नकली तो नहीं?
काश! इन्दिरा गांधी का “क्लोन” होता,
गांधी,शास्त्री और नेहरू का “क्लोन” होता,
तब आज की राजनीति कुछ और होती?
कम से कम देश की ऐसी दुर्दशा तो न होती।
“क्लोन” का एक और फायदा है,
अब कोई स्त्री विधवा न होगी,
क्योंकि पति का हमशक्ल तो रहेगा ही,
और वो असली का काम करेगा,
सोचो कितनी सुन्दर होगी यह दुनिया?
हर शख्स की कमी ‘क्लोन’ से भर लेगी यह दुनिया,
जीवन-मरण का बंधन ही टूट जायेगा,
क्योंकि मोक्ष का विभाग ही खत्म हो जायेगा।
“क्लोन से कई खतरे हैं,
जैसे गलती करेगा “क्लोन”
लेकिन पीटे आप जाओगे,
क्या तब भी आप अपना “क्लोन” बनवाओगे???डा. रमा द्विवेदी
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‘क्लोन’मानव (एक हास्य-व्यंग्य कविता)
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आप ये क्यो भूल रही हैं कि फिर लादेन कितने होगें।अच्छे कम और बुरो का जमगट लग जाएगा।
आप ये क्यो भूल रही हैं कि फिर लादेन कितने होगें।अच्छे कम और बुरो का जमगट लग जाएगा।अच्छी रचना है।
यह भी तो हो पायेगा कि लफड़े के काम सारे खुद करके मजे लूटो और पिटने के लिये क्लोन!! वाह वाह!!
नमस्कार रमाजी,
क्लोनिंग पर पहली बार इतनी मौलिक चिंतनपरक रचना पढ़ी। कविता पढ़कर बहुत अच्छा लगा।
परमजीत जी,
आपने सही कहा कि लादेन जैसे लोगों का भी जमघट लग जायेगा… अच्छाई के साथ बुराई भी तो आती ही है….आभार सहित….
समीर जी,
आप के लिए यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा….:))…. मजेदार प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…
डा. रमा द्विवेदी
अभिनव जी,
प्रथम तो आपका मेरे ब्लाग पर स्वागत है…..आपकी प्रथम प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्व पूर्ण है…आपके अमूल्य विचारों को जानकर बहुत हर्ष हुआ… आशा है भविष्य में भी आप अपने चिन्तन -मनन से अवगत कराते रहेंगे….बहुत बहुत आभार सहित…..अभिनव जी क्या आपको याद है हम हैदराबाद में पहले मिल चुके हैं?
डा. रमा द्विवेदी
्खूबसूरत कल्पना और सुन्दर अभिव्यक्ति
एक खुद से हम हैं परेशान
जब दो हम होंगे तो
दुगने होएँगे हम परेशान
बेचारे बालकों की तो सोचो
एक कक्षा दो अध्यापक होंगे
दो गाल और चार झाँपड़ होंगे ।
सुन्दर कविता !
घुघूती बासूती
राकेश जी,
आपका आशीष इस रचना को मिल गया बस रचना सार्थक हो गई….आभार सहित..
बासूती जी,
आपकी पंक्तियां पढ़कर आनंद आ गया…बहुत सुन्दर…..बहुत बहुत शुक्रिया…
डा. रमा द्विवेदी
मैडम,
एक और सुंदर कविता मगर हास्य-व्यंग के रुप में…।
विज्ञान वरदान तो है ही मगर कुछ के लिए तो यह अभिशाप है
उसमें यह क्लोन है…जो प्रकृति के बनावट को पूरी तरह बदल
देगा…वैसे भी 2000 के बाद हम सब विनाश की ओर बढ़ रहे है…
तो यह सब उसी के तरफ जाती है… और बहुत व्यापक रुप में
सार्थक आलोचना हुई है पढ़कर सोंच में पड़ गया था कुछ देर की
क्या प्रतिक्रिया दूं।
दिव्याभ जी,
आपकी बात सही है… हम विनाश की ओर ही बढ़ रहे हैं….ये आविष्कार हमें चेतावनी दे रहे हैं….अपने विचारों से हमेशा अवगत कराते रहियेगा…इसी आशा के साथ….आभार सहित…
डा. रमा द्विवेदी
विज्ञान के इस गंभीर विषय को लेकर वयंग्य और हास्य की यह रोचक कविता
असाधारण और अद्भुत है। प्रायः हिंदी हास्य/व्यंग्य साहित्य में विज्ञान संबधित
विषय कम ही दिखाई देते हैं।
इसके लिए आप निर्विवाद अनेकानेक बधाईयों के पात्र हैं। स्वीकार कीजिये।
आदरणीय शर्मा जी,
आपके आशीष के बिना मेरी रचना सार्थक हो ही नहीं सकती…..कुछ ऐसी मानसिकता बन गई है कि हमेशा आपके विचारों का इन्तज़ार रहता है…..हार्दिक आभार सहित…..
डा. रमा द्विवेदी