प्रेम में झूमों तुम ऐसे….
प्रेम पाना चाहते गर गुनगुनाना सीख लो।
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥प्रेमी-मन को जब नहीं तुम जानते-पहचानते,
झूठे अहं को त्याग दो,सच को अपनाना सीख लो..
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥प्रेम भी इक गीत है, तुम इसको गाना सीख लो,
प्रेमी तुम्हें मिल जाएगा बस तुम बुलाना सीख लो…
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥गीत लिखना चाहते गर ग़म उठाना सीख लो,
गीत तो लिख जाएगा,दिल को तपाना सीख लो…
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥सोचकर जो लिक्खा जाए गीत कहलाता न वो,
हृदतंत्री को झन्क्रित जो कर दे ऐसा गीत लिखना सीख लो…
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥प्रेम इक अहसास है,फूलों में खुशबू की तरह,
शर्त है कि फूलों जैसे खिलखिलाना सीख लो..
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥प्रेम अरु प्रेमी में जब अन्तर नज़र आता नहीं,
प्रेम में खुद को मिटाना यह अदा भी सीख लो…
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥प्रेम की मादकता को, ऐसे न तुम सह पाओगे,
लहरों सा उठना-मचलना,यह कला भी सीख लो…
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥डा. रमा द्विवेदी
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सीख लिया गुनगुनाना-और गीत भी पसंद कर लिया. इसलिये अब बधाई दे रहे हैं इस अच्छे और सुन्दर गीत के लिये.स्विकारें.
गीत पसन्द करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया समीर जी.
डा. रमा द्विवेदी
प्रेम की परिभाषा और प्रेम का वास्तविक रूप इस प्रवाहपूर्ण गीत में बड़े सुंदर शब्दों
में दिए गए हैं। प्रेमी तो इसे एक बार पढ़ कर गुनगुनाते ही रहेंगे और यह भी पहचानने
लगेंगे किः
प्रेम इक अहसास है,फूलों में खुशबू की तरह,
शर्त है कि फूलों जैसे खिलखिलाना सीख लो..
प्रेम में झूमो तुम ऐसे लहलहाना सीख लो॥
आदरणीय शर्मा जी,
प्रेम-गीत प्रेमियों के लिए ही है…उन्हें गुनगुनाना ही चाहिए
आपको पसन्द आया मेरा लिखना सार्थक हो गया…स्नेह के लिए आभारी हूं…