अनुभूति कलश

अहसासों को संजोया है मैंने, अनुभूतियों को पिरोया है मैंने, बने सत्य,शिव, सुन्दरम यह कलश, मानस की गंगा में धोया है मैंने..

चित्र-वीथि: ‘म्यूज-मीट्स’२००५, दीप प्रज्ज्वलित करती डा. रमा द्विवेदी

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August 7, 2007 - Posted by ramadwivedi | चित्र-वीथि | | 1 Comment

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  1. अच्छा लगा सभी तस्वीरें देख कर. :)

    Comment by समीर लाल | August 8, 2007

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