इक पौधा तो लगाइए

       ज़िन्दगी की क्यारी में इक पौधा तो लगाइए,
       दूसरों को हंसने दें औ खुद भी मुस्कुराइए।

       जल रही है धरती और जल रहा जहान है,
       जल रहा है चप्पा-चप्पा,जल रहा आसमान है,
       नफ़रतों को त्याग कर प्यार को अपनाइए…
       ज़िन्दगी की क्यारी में इक पौधा तो लगाइए।

      तेरा  -मेरा करके हमें कुछ नहीं मिल पाएगा,
      मिल बांट्के खाएंगे गर स्वर्ग भी मिल जाएगा,
      शिकवे-गिले  छोड़कर अब तो मान जाइए….
      ज़िन्दगी की क्यारी में इक पौधा तो लगाइए,

      खाली हाथ आए हैं, खाली हाथ जाएंगे,
      गर किए सत्कर्म तो साथ वो ही जाएंगे,
      ज़िन्दगी है चार दिन कुछ पुण्य करके जाइए..
      ज़िन्दगी की क्यारी में इक पौधा तो लगाइए,

      पंच तत्व से बना मानव का शरीर है,
      कर्ज़ है प्रकृति का तुझ पे फिर भी तू अधीर है,
      ब्याज भी गर छोड़ दें मूल तो बचाइए….
      ज़िन्दगी की क्यारी में इक पौधा तो लगाइए,

        डा. रमा द्विवेदी

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