नववर्ष फिर आया है

    एक वर्ष भी बीत गया, नया  वर्ष फिर  आया है,
    कितना खोया,कितना पाया?गणित नहीं लग पाया है।

    कितने पल हमसे रूठ गए,कितनी विभूतियां खोई हैं,
    कितने शूल चुभे अन्तस में,कितनी मालाएं पिरोई हैं,
    मंदिर में कुछ पल बीत गए,श्मशान से कभी बुलावा है।
    कितना खोया,कितना पाया?गणित नहीं लग पया है॥

    भावों के आलोड़न से मन-आंगन में रची रंगोली,
    इक पल सेज सजी दुल्हन की,दूजे पल मेंहदी धो ली,
    सुख-दु:ख के बैठ हिंडोले  नियति ने क्रम दोहराया है।
    कितना खोया,कितना पाया?गणित नहीं लग पाया है॥

    जैसे भी कट गया सफर,क्या कल भी ऐसा कट पाएगा?
    रिश्तों की बगिया में क्या फिरसे स्नेह सुमन खिल पाएगा?
    फूल खिला जो डाली  पर पतझड़ नें उसे मिटाया है।
    कितना खोया,कितना पाया?गणित नहीं लग पाया है॥

    नाहक झगड़ा करते हम,कुछ भी अपना नहीं यहां,
    चन्द दिनों का अभिनय कर लें,क्या जाने कल कौन  कहां?
    सांसों की लय कब टूटेगी यह जान न कोई पाया है?
    कितना खोया,कितना पाया?गणित नहीं लग पाया है॥

     डा. रमा द्विवेदी

 

‘अनुभूति कलश’ के सभी पाठकों व लेखकों को नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं।


शोक संदेश

बहुत दु:ख के साथ सूचित कर रही हूं कि हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री डा. प्रतिभा गर्ग जी का कल सायंकाल निधन हो गया है जिससे साहित्य जगत  अत्यन्त शोक संतप्त है ।  कुछ ही दिन पहले आपको ’महादेवी वर्मा सम्मान’ से सम्मानित किया गया था एवं २ दिसम्बर को आपने अपना काव्यसंग्रह ’स्नेह सलिला’ का भी उन्होंने लोकार्पण किया था ।आप कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद की संरक्षिका एवं आथर्स गिल्ड आफ इंडिया की आजीवन सदस्या थीं लगभग एक दर्जन पुस्तकों की सृजनकर्ता एवं साहित्य सुमन की अध्यक्षा  आज हमारे बीच नहीं हैं ।ईश्वर से हम यही प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को इस  असह दु:ख को सहन करने की शक्ति दे। कादम्बिनी क्लब ,हैदराबाद एवं आथर्स गिल्ड आफ इंडिया की ओर से उन्हें शत-शत नमन…..ओम शान्ति……

   डा. रमा द्विवेदी

परम श्रद्धेय त्रिलोचन जी के निधन से हिन्दी साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति हुई है,उन्हें कादम्बिनी परिवार,हैदराबाद की ओर से शत-शत नमन।