स्वागत तेरा नववर्ष

         स्वागत  तेरा नववर्ष है,स्वागत तेरा नववर्ष है॥         
         आगमन पर तेरे जन-जन के मन में हर्ष है।

         सूर्य अपनी ऊष्मा धरती को है दे रहा
         चांद अपनी चांदनी को नेह से भिगो रहा।
         तारे सलाम कर रहे चहु ओर जैसे पर्व है,
         स्वागत तेरा नववर्ष है,स्वागत तेरा नववर्ष है॥

         नेह का अनुबंध सृष्ठि का प्रथम अध्याय है,
         इंसान की इंसानियत भी प्रेम का पर्याय है,
         प्रेम से ही ज़िन्दगी है, प्रेम से उत्कर्ष है
         स्वागत तेरा नववर्ष है,स्वागत तेरा नववर्ष है॥

         पर्वतों की अलसाई भोर चुपके से कुछ कह रही,
         लग रहा ज्यों प्रकृति-दुल्हन अंगड़ाई ले उठ रही,
         पवन करे अठखेलियां ज्यों रच रहा नवसर्ग है।
         स्वागत तेरा नववर्ष है,स्वागत तेरा नववर्ष है॥

            डा. रमा द्विवेदी

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2 Comments

  1. mehek said,

    January 16, 2008 at 5:45 am

    bahut khubsurat andaz main swagat kiya hai ramajinav varsh ka,sari prakruti jaise khil uthi ho.

  2. ramadwivedi said,

    January 16, 2008 at 4:05 pm

    महक जी,

    ‘अनुभूति कलश’ में प्रथम आगमन पर आपका स्वागत है…आपको रचना पसन्द आई इसके के लिए हार्दिक आभार….आशा है भविष्य में भी अपने विचारों से अवगत करवायेंगी…

    डा. रमा द्विवेदी

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