कुछ क्षणिकाएं ‘प्यार’ पर

      १-    प्यार नाम है बस,
            कुछ पल के आकर्षण का,
            प्यार नाम है
            सहूलियत का,
            आदमी को तलाश है बस ,
            कुछ पल के प्यार की ।

      २-    रिश्तों का टिकाऊपन,
            अब प्यार पर निर्भर नहीं,
            वह निर्भर करता है,
            अर्थ के फोर्स पर,
            सुख-सुविधाओं के सामान पर,
            रिश्तों की जितनी अधिक ज़रूरतें
            पूरी होंगी,
            प्यार गहराता जाएगा,
            यदि आप ऐसा न कर सके,
            रिश्तों का विशाल भवन,
            रेत के महल की तरह,
            कुछ पल में भरभरा कर गिर जाएगा ।

      ३-   प्यार कभी शाश्वत नहीं होता,
           प्यार का वह क्षण शाश्वत होता है ,
           जिस क्षण प्यार होता है या किया जाता है,
           इसकी पुनरावृत्ति यदि बारम्बार हो तो
           हम भ्रमित हो जाते हैं,
           कि अगला हमें बहुत प्यार करता है,
           जन्म-जन्मान्तरों के प्यार का,
           जो दावा करते हैं,
           वह प्यार नहीं,
           दूसरों को छलते हैं ।

      ४-   प्यार बस लम्हों में
           जन्म लेता है,
           प्यार का वो लम्हा,
           जीने के बाद ही,
           दम तोड़ देता है ।

     ५-    आधुनिक प्यार के ,
           मायने बदल गए हैं,
           प्यार अब निष्ठा विश्वास
           का नाम नहीं,
           प्यार अब दिल बहलाने का
           झुनझुना बनकर रह गया है। 

            डा. रमा द्विवेदी
           © All Rights Reserved

Published in: on March 13, 2008 at 10:11 am Comments (10)

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10 Comments Leave a comment.

  1. आपकी चिंता वाजिब है। क्योंकि अब प्यार के मायने बदल रहे हैं। इसकी अनुभूति और इसके प्रदर्शन का लहजा बदल गया है। मगर यह भी सत्य है कि दुनिया से प्यार का अंत नहीं हुआ।

  2. प्यार बस लम्हों में
    जन्म लेता है,
    प्यार का वो लम्हा,
    जीने के बाद ही,
    दम तोड़ देता है

    उम्‍दा लाइनें है

  3. प्यार बस लम्हों में
    जन्म लेता है,
    प्यार का वो लम्हा,
    जीने के बाद ही,
    दम तोड़ देता है ।

    बहुत सुद्नर लगी यह सब ..

  4. बहुत सही. बहुत बढ़िया रचनाएं.

  5. डा. रमा द्विवेदी said…

    अहमद जी, आशीष जी, रंजना जी एवं मीत जी,

    आप सबको क्षणिकाएं पसन्द आईं….बहुत बहुत हार्दिक आभार….

  6. bahut hi sundar tarike se pyar ko saheja hai,badhai

  7. nice one keep visiting for more http://write2ankit.blogspot.com

  8. दिल को छू गईं….वाह!! क्या कहूँ..कुछ कहूँ..चलिये..जाने देते हैं. :)

  9. jyadatar log jin cheezo me bhramit rahte hain aapne bahut spasht kiya hai unhe
    par fir bhi yahi kahoonga ki inhe samjhne wale bahut kam hian

  10. शुभाशीष जी,

    कवि जो महसूस करता है वह लिखता है… अब कोई समझे न समझे…यह वह उन्हीं पर छोड़ते हैं…बस मैं तो यही कह सकती हूं…..


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