हाइकु
March 24, 2008 at 5:46 am (हाइकु)
१- मंड़प बैठी,
सरसों गदराई,
धरा सिमटी।२- लिपटी कहीं,
महकी कहीं और,
रोया था पेड़ ।३- झूठे वचन,
अर्चनाएं बेकार,
मन में यार।४- नशा प्यार का,
ममत्व का हनन,
बच्चे अनाथ।५- प्रेयसी हंसी,
गुलमोहर लाल,
पत्नी उदास ।६- अकेलापन,
संवेदनाएं बर्फ,
तपस्या भंग ।डा. रमा द्विवेदी
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समीर लाल said,
March 24, 2008 at 5:05 pm
बहुत बेहतरीन..वाह!!!! होली मुबारक, जी॒!!!!
sarika kalyan said,
April 8, 2008 at 11:12 am
loved it !!! thanx for sharing…