सभी मित्रों को नववर्ष की मंगल कामनाएं। नववर्ष सबके लिए सुख-संमृद्धि एवं वैभवपूर्ण हो। —डा. रमा द्विवेदी
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झील की लहरों पर बिखरता है स्वर्ण
पत्तों पर छा रहा नया नया वर्ण
अँगड़ाई लेते हैं कोयल के गीत
अलगोजे छेड़ रहे मधुरिम संगीत
आँगन में उतर रही सोनहली धूप
संध्या के दर्पण में नया नया रूप
पुरबा की चूनर में मलयज की शान
कलियों के चेहरों पर आई मुस्कान
पगडंडी है लदी हुई गाड़ियों भरी
सरसों की दुल्हन अब पालकी चढ़ी
निशिगंधा खोल रही महकों के द्वार
खुनक भरे मौसम में डूबा घरबार
भरा प्रेम पत्रों से मेंहदी ने हाथ
छत ने की आँगन से मीठी सी बात
ठिठुरन पर आज चढ़ा देखिये बुखार
चैती इस पड़वा ने खड़काया द्वार.
नव संवत की शुभकामनायें
आपके लिये भी बहुत मंगल कामनायें. बधाई हो.
aapako bhii badhaayi
aapko bhi nav varsh ki dhero shubhkamnaye !!
आपको भी युगादी की शुभकामनाएं.