दो मुक्तक
April 13, 2008 at 5:53 pm (मुक्तक)
Tags: मुक्तक
१- जरा-मरण के बीच में
दूरी है इक साँस की।
साँस रुकी तो मृत्यु मिलेगी,
मृत्यु रुकी तो ज़िन्दगी॥२- ज़िन्दगी के रंगों में
इक रंग मुझको भा गया।
जीते-जीते ज़िन्दगी पर ,
प्यार मुझको आ गया॥डा. रमा द्विवेदी
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mehhekk said,
April 13, 2008 at 6:20 pm
bahut sundar
DR. CHANDRAKUMAR JAIN said,
April 18, 2008 at 6:18 am
सुंदर.सजग.सकारात्मक प्रस्तुति.
जीवन दर्शन और
बोध से सधी हुई.
बधाई .
ramadwivedi said,
April 18, 2008 at 12:36 pm
महक जी एवं डा. जैन जी,
रचना पर अपने विचार प्रेषित करने के लिए हार्दिक आभार….