जीवन का यह चलन
April 14, 2008 at 5:45 pm (गीत)
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पवन चले सनन-सनन मेरे देश में,
पायल बजे छनन-छनन मेरे देश में।शहनाइयाँ कहीं बज रहीं,
ड़ोलियाँ कहीं सज रहीं,
कंगना करें खनन-खनन मेरे देश में…
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।बगिया कहीं महक रही,
कहीं तितलियाँ बहक रहीं,
भौरे फिरैं चमन-चमन मेरे देश में..
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।कहीं बदलियाँ बरस रहीं,
कहीं सजनियाँ तरस रहीं,
आँसू गिरैं घनन-घनन मेरे देश में…
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।हिमगिरि कहीं विराट है,
सागर कहीं विशाल है,
नदियाँ बहैं मगन-मगन मेरे देश में..
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।कहीं योगी तप मेम लीन है,
कहीं भोगी रस-विलीन है,
जीवन का यह चलन-चलन है नेरे देश में..
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।डा. रमा द्विवेदी
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Atul Kumar said,
April 15, 2008 at 2:31 pm
हिमगिरि कहीं विराट है,
सागर कहीं विशाल है,
नदियाँ बहैं मगन-मगन मेरे देश में..
पवन चले सनन-सनन मेरे देश में।
ramadwivedi said,
April 18, 2008 at 12:39 pm
अतुल जी,
आपका हार्दिक आभार ….