उड़ने की कोशिश (क्षणिका)
April 30, 2008 at 5:23 pm (क्षणिकाएं)
Tags: क्षणिका
चिड़ियों की ऊँची और ऊँची,
उड़ने की कोशिश भी,
आकाश को छू नहीं पातीं,
पर इसका अर्थ,
यह कतई नहीं,
कि वे उड़ना छोड़ दें।
डा. रमा द्वि्वेदी
April 30, 2008 at 5:23 pm (क्षणिकाएं)
Tags: क्षणिका
चिड़ियों की ऊँची और ऊँची,
उड़ने की कोशिश भी,
आकाश को छू नहीं पातीं,
पर इसका अर्थ,
यह कतई नहीं,
कि वे उड़ना छोड़ दें।
डा. रमा द्वि्वेदी
समीर लाल said,
April 30, 2008 at 9:22 pm
मंजिल पाने की कोशिश ही जीवन है.
mehek said,
May 1, 2008 at 3:50 am
bahut sahi udana hi unchai tak pahuncha sakti hai.
राजीव रंजन प्रसास said,
May 1, 2008 at 7:59 am
इसका अर्थ,
यह कतई नहीं,
कि वे उड़ना छोड़ दें।
गहरी क्षणिका..
***राजीव रंजन प्रसाद
ramadwivedi said,
May 1, 2008 at 8:09 am
समीर जी, महक जी एवं राजीव जी,
रचना पसन्द करने के लिए आप सबका हार्दिक आभार…..सादर….