उड़ने की कोशिश (क्षणिका)

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        चिड़ियों  की ऊँची और ऊँची,

         उड़ने की कोशिश भी,

         आकाश को छू नहीं पातीं,

         पर इसका अर्थ,

         यह कतई नहीं,

         कि वे उड़ना छोड़ दें।

        डा. रमा द्वि्वेदी   

4 Comments

  1. समीर लाल said,

    April 30, 2008 at 9:22 pm

    मंजिल पाने की कोशिश ही जीवन है.

  2. mehek said,

    May 1, 2008 at 3:50 am

    bahut sahi udana hi unchai tak pahuncha sakti hai.

  3. राजीव रंजन प्रसास said,

    May 1, 2008 at 7:59 am

    इसका अर्थ,
    यह कतई नहीं,
    कि वे उड़ना छोड़ दें।

    गहरी क्षणिका..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  4. ramadwivedi said,

    May 1, 2008 at 8:09 am

    समीर जी, महक जी एवं राजीव जी,

    रचना पसन्द करने के लिए आप सबका हार्दिक आभार…..सादर….

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