चुप-चुप रह कर आंसू पीना,
आसान न यह गम होता है।
मिट-मिट करके जीते जाना,
आसान न यह दम होता है॥बंधुआ बन-बन कर जीना,
आसान न वो मन होता है।
तप-तप कर कुछ बनते जाना,
आसान न यह फ़न होता है॥तन का बंधन,मन का क्रंदन,
यह बोझ न कुछ कम होता है।
कोल्हू के बैल सा चलते जाना,
आसान न यह श्रम होता है॥सच्चाई पर चलते जाना ,
आसान न यह पथ होता है।
उम्मीदों पर जीवित रहना,
आसान न यह भ्रम होता है॥डा. रमा द्विवेदी
आसान नहीं
यही शिकायत है
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है,
न मिल सका हमसफ़र कोई,
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।ज़िन्दगी की दौड़ में,
इक पल भी नहीं ठहरता,
खुद के लिए चुरा सकूं,
इक पल भी नहीं वो मिलता,
न बन सका दिलवर कोई…
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।सांसें विषैली हो गईं,
हर सांस विष उगलती है,
रिश्तों की डोर क्षण-क्षण,
हिम की तरह पिघलती है,
बन न सका हमदम कोई…
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।चाही नहीं थी दौलत,
चाहे न हीरे -मोती,
इक यार की तमन्ना,
ख्वाहिश यही थी दिल की,
न मिल सका वस्ल-ए-यार कोई…
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।दोस्ती के बीच भी आज,
न जाने कितने सवाल हैं,
इक सवाल हल होता नहीं
फिर सैकडों सवाल हैं,
बन न सका हमराज़ कोई…
ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।डा. रमा द्विवेदी