आंसू एक : अर्थ अनेक

अश्रु बहें तो कभी दु:ख का या कभी कमजोरी लाचारी के प्रतीक माने जाते हैं लेकिन कभी कभी खुशी के आधिक्य में भी आंसू छलक पड़ते हैं। उल्लेखनीय यह है कि दोंनो प्रकार के आंसुओं में जमींन -आसमान का अन्तर होता है । दु:ख में हृदय हाहाकार करके रोता है और खुशी में मन रोमांचित होने पर आंसू झर-झर झरते हैं। दोनों का स्त्रोत उद्गम तो आंख ही है, आंसू भी एक ही है फिर अर्थ और अहसास भिन्न-भिन्न कैसे बन जाते हैं?
अश्रु दर्द में भी न गिरें ऐसा बहुत कम होता है । अश्रु खुशी में हरदम गिरें ऐसा भी बहुत कम होता है । विचित्र स्थिति और विचित्र प्रश्न है। कभी -कभी आदमी दुर्धर कष्ट में या अपने किसी प्रिय के मृत्यु हो जाने पर भी नहीं रोता । ऐसा क्यों होता है? क्या आंसुओं की खुद्दारी है या उनकी निर्दयता, क्योंकि आंसू ही आंख को संवेदनशील रखते हैं। अगर “आंख का पानी सूख जाए” तब क्या व्यक्ति कुछ देख पाएगा नहीं ना”? पानी का कितना महत्व है यह तो आप समझ ही गए होगें । इसलिये ही शायद कवि रहीम ने लिखा था” रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी बिना न ऊबरे मोती मानुष चून।” पानी पर बहुत सारे मुहावरे भी हैं….”आंख का पानी ढलक जाना”,पानी पानी होना,पानीदार होना “इत्यादि। ये सब आंख के पानी की ओर ही संकेत कर रहे हैं । आंख के पानी यानि आंसू को “मोती” कहकर भी नवाज़ा गया है लेकिन क्या कोई इन मोतियों की कीमत समझ पाया है? हम इन्हें व्यर्थ गिराकर खो देते हैं लेकिन हम खोते कहां हैं? आंसू बहने से आंख स्वच्छ होकर और भी सुन्दर और संवेदनशील हो जाती है इसलिए कभी-कभी रोना भी जरूरी है । ऐसा भी कहा जाता है कि आंसुओं के बहने से हृदय का दर्द निकल जाता है और मन हल्का महसूस करता है।
अब प्रश्न यह उठता है कि जब खुशी में आंसू बहते हैं तब खुशी बह नहीं जाती बल्कि उसकी अनुभूति और अधिक बढ़ जाती है । अजीब बात है आंख से बहने वाले आंसू के दो सर्वथा भिन्न अर्थ कैसे हो जाते हैं ? जो भी हो आंसुओं का कभी- कभी बहना आंखों के लिए लाभकारी है इसलिये जब रोने का दिल करे तब अवश्य रो लेना चाहिए ।

डा. रमा द्विवेदी

© All Rights Reserved

सभी मित्रों को ज्योति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं… डा. रमा द्विवेदी

Published in:  on October 27, 2008 at 10:41 pm Leave a Comment
Tags:

Pushpak-9 ka Lokarpan

Published in:  on October 23, 2008 at 11:08 pm Leave a Comment

kahani ka Rangmanch aur Natya Rupantaran

Published in:  on at 10:47 pm Leave a Comment

Sahitya Garima puraskar se Dr. Gunmala Somani sammanit

Published in:  on at 10:34 pm Leave a Comment
Tags: