कहीं अहसास बिकते हैं,
कहीं विश्वास बिकते हैं,
अगर दिल टूट जाए तो,
दीवाने खास बिकते हैं।
कहीं मेंहदी हँसाती है,
कहीं मेंहदी रुलाती है,
पिया का प्यार मिल जाए ,
तो मेंहदी रंग लाती है।
जमाने के हैं क्या कहने,
चुराते आँख का काजल,
अगर हों आँख में आँसू,
तो हँसते हैं वे जीभरकर।
डा.रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved
बहुत सुन्दर गीत है।बधाई।
सुन्दर मुक्तक छंदबद्ध किये हैं. बधाई.
Respected Dr saheb
a good composition but please do away with negativity.Indian women has got a tradition of extreme greatness and is considered best in the world.I am showing another dimension of your fantastic poem by my self composed answer just to honour you only Regards
Dr Vishwas saxena
अहसास जो खरीदे कोई वो कितना बीमार है
विश्वास के आभाव में वो मर्नासार है
मेहँदी है गहना सतीत्व की
नहीं आश्रित किसी की दया की
काजल चुरा वो दृष्टी कहाँ पाई जा सकती है
आंसू पर हंसके ख़ुशी कहाँ ली जा सकती है
स्वयं हो बुलंद भावना पालेंगे
एक दिन अपने श्रम से मंजिल प् ही लेंगे