तुम्हीं न कर सके इकरार कभी…

हमने तो सदा ऐतबार किया था तुमपे,
हमने तो खरा प्यार किया था तुमसे,
तुम्हीं न कर सके इकरार कभी,
हमने तो बार-बार इज़हार किया था तुमसे।

हमारे प्यार की है इल्तिज़ा तुझसे,
हमारे प्यार की है इम्तिहां तुझसे,
हमारा प्यार है गहरा कई समन्दर से,
हमारे प्यार की है इन्तिहां तुझसे।

हमारा प्यार है जहाँ वहीं सवेरा है,
हमारा प्यार है जहाँ वहीं बसेरा है,
हमारे प्यार की खुश्बू ज़मीं से अंबर तक,
हमारा प्यार जहाँ चंद्रमा का ढ़ेरा है।

हमारे प्यार के खातिर ही सूर्य उगता है,
हमारे प्यार के खातिर ही चाँद ढ़लता है,
हमारे प्यार से सारा चमन महक जाए,
हमारे प्यार के खातिर भ्रमर मचलता है।

डा. रमा द्विवेदी
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कुछ रिश्तों के लिए

१- तेरे प्यार का यह कैसा भरम है?
नहीं पास तुम हो,नहीं दूर हम हैं।
नहीं देते हँसने,नहीं देते रोने,
तेरे प्यार का यह कैसा सितम है?

२- नहीं सुनते फ़रियाद कोई हमारी,
रही बेबसी दिल की बेबश बेचारी।
किस ओर जाएं, न सूझे कोई राह,
लिया लूट ज़ालिम ने पूंजी है सारी।

३- मेरे प्यार का क्या कोई मुआयज़ा है?
समझ न सके तुम तो क्या फ़ायदा है?
हो दौलत या जायदाद अर्जी मैं दे दूँ,
तुझे पाने का क्या कोई कायदा है?

४- तेरे मन में क्या है समझ न सके हम,
रहें रात-दिन साथ कुछ न कहो तुम।
कहो क्या करें हम,मिटें फ़ासले सब,
हमें आजमाने की ज़िद न करो तुम।

डा.रमा द्विवेदी
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किसी के दरमियाँ यूँ ही

किसी के दरमियाँ यूँ ही नहीं आतीं हैं तलखियाँ,
कोई तो बात होती है गिरातीं हैं बिजलियाँ।

वक़्त के बहाव में बह जाते हैं अक्सर लोग,
किनारे पर उन्हीं की डूब जातीं हैं कश्तियाँ।

किसी का देखकर सुखचैन हो जाते हैं जो ग़मगीन,
द्वेष की आग से ही जल जातीं हैं बस्तियाँ।

बड़े खामोश बैठे हैं नहीं कुछ बात करते वो,
ज़ुबां खोले बिना ही बरस जातीं हैं बदरियाँ ।

चमन के हर सुमन पर भ्रमर का मन मचलता है,
भ्रमर की इस अदा पर ही बहक जातीं हैं तितलियाँ ।

डा.रमा द्विवेदी
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Published in:  on May 7, 2009 at 7:25 am Comments (14)