गर्मी की ऋतु ऐसी

गर्मी की ऋतु ऐसी
जिसमें साजन भये विदेशी
सारे ए.सी. बन्द पड़े
कैसे कैसे समय कटे।

तन जलता
मन बहुत मचलता
दिन निकले कैसे
शुष्क नदी में
मीन तड़पती
बिन पानी जैसे
ताल तलैया सूख गए हैं
पोखर सब सिमटे।

अंगिया उमसे
बिस्तर चुभता
तन तरबतर हुआ
कहाँ जायें है पीछे खाई
आगे मुआं कुआं
सब सोलह शृंगार व्यर्थ ही
टप टप टप टपके।
कैसे कैसे समय कटे।

–डॉ. रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Published in:  on June 24, 2009 at 10:56 pm Comments (1)
Tags:

The URI to TrackBack this entry is: http://ramadwivedi.wordpress.com/2009/06/24/%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8b%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a5%80/trackback/

RSS feed for comments on this post.

One Comment Leave a comment.

  1. ब्लॉग लिखिये, कविता रचिये…अरे, रच तो दी. कुछ समय तो कट ही गया होगा.

    वाकई, सुन रहे हैं कि गरमी ने हालाकान कर रखा है लोगों को!


Leave a Comment