१- रेखाओं की भी,
होती है एक इबारत,
पढ़ सको तो पढ़ लेना ।
२- रेखाएँ!
सोच-समझ कर खींचना
ये अभिशाप भी बन सकती हैं
और
वरदान भी ।
३- हस्त रेखाएँ,
बताती हैं भाग्य,लेकिन
क्या कोई सच में,
इन्हें पढ़ पाया है।
४- भाग्य रेखाएँ
यदि कोई पढ़ पाता
तब हर किसी का भाग्य,
सौभाग्य होता|
५- रेखाओं का समीकरण,
अक्षर की व्यतुपत्ति,
शब्द निर्माण,
और शब्द रचते हैं,
गीता,पुराण,
महाकाव्य और महाभारत।
६- एक लक्ष्मण रेखा,
क्या लांघी?
सीता हरण हो गया,
भयंकर राम-रावण युद्ध,
एक युग का अन्त।
७-रेखाओं का जाल,
उलझती जीवन शैली
का मापदंड।
८- समानान्तर रेखाएँ
किसी को काटती नहीं,
इसलिए जीवन का बीजगणित,
अर्थवान हो उठता है।
९- मेहनत!
भाग्य रेखाओं को,
नया मोड़ दे देती है।
१०- जीवन का समीकरण,
सिर्फ
भाग्य रेखाओं से नहीं बनता।
११- रेखाएँ!
सीधी,आडी,तिरछी,
खींच कर देखिए,
कभी- कभी,
कुछ महत्वपूर्ण बन जाता है।
१२- रेखाओं को यूँ ही
व्यर्थ मत करो,
क्योंकि यही रेखाएँ
होती हैं सभ्य संस्कृति
और सभ्य समाज की धरोहर।
१३- संसार भर की
भाषाओं एवं लिपियों का विकास
रेखाओं के संतुलन पर टिका है।
१४- रेखाएँ ,
नदी के दो किनारे जैसी हों,
और रिश्तों के बीच बहती रहे,
मिठास, स्नेह और आत्मीयता।
१५- रेखाओं की संवेदना को,
कठोर न बनने दें,
नहीं तो,
मनुष्यता नष्ट हो जाएगी।
डा.रमा द्विवेदी
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Dr Rama
Rekhao par bahut sundar kavita. sadhuvad
कनुश्री जी,
अनुभूति कलश पर आपका स्वागत है…आपको रचनाएँ पसन्द आईं ….बहुत बहुत शुक्रिया…भविष्य में भी अपने विचारों से अवगत करवाते रहियेगा …इसी आशा के साथ…सादर…
डा.रमा द्विवेदी
future ki site pe kavita ka kya kaam
Ujjawal ji,
Aap kya kahnaa chaahte hain main kuchh samajhee naheen …..kripyaa spaShT kariye….saadar…
Dr.Rama Dwivedi