समझ लेना तुम

ये फिज़ायें गुनगुनाती हरदम, यह समझ लेना तुम।

ये वादियाँ तलाशती हमदम,यह समझ लेना तुम ॥

बहारें आयेंगी गर ,पतझड़ भी जरूर आयेगा,

यही चमन का नियम ,यह समझ लेना तुम॥

हवाएं धीरे से बहतीं  ,  कभी तूफ़ां की तरह,

समन्दर में भी रहती है अगन,यह समझ लेना तुम॥

वफ़ा के वादे से जब चाँद मुकर जाता है,

वफ़ा का सूर्य मुस्कराता हरदम,यह समझ लेना तुम॥

जहां में कौन है ऐसा जिसे कोई ग़म न हो,

खुशी अरु ग़म में अनुपात बहुत कम,यह समझ लेना तुम॥

सभी को इक दिन यमराज का मेहमां बनना है,

कभी न भरना अमरता का दम,यह समझ लेना तुम॥

जमीं औ आसमां मिलते दिखाई देते क्षितिज पर,

मिलन के भ्रम में भी सरगम,यह समझ लेना तुम॥

डा. रमा द्विवेदी

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Published in:  on October 30, 2009 at 12:15 am Comments (8)
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8 Comments Leave a comment.

  1. जहां में कौन है ऐसा जिसे कोई ग़म न हो,

    खुशी अरु ग़म में अनुपात बहुत कम,यह समझ लेना तुम॥
    जीवन का चिरंतन सत्य, पर अभिव्यक्ती बहुत सुंदर ।

  2. जबरदस्त है जी. बहुत खूब!!

  3. बहुत सुंदर .. ये रचना यथार्थ के धरातल पर रहना सीखाती है !!

  4. खूब समझ लिया जी …!!

  5. वफ़ा के वादे से जब चाँद मुकर जाता है,

    वफ़ा का सूर्य मुस्कराता हरदम,यह समझ लेना तुम॥

    जहां में कौन है ऐसा जिसे कोई ग़म न हो,

    खुशी अरु ग़म में अनुपात बहुत कम,यह समझ लेना तुम॥
    waah behad khubsurat.

  6. जहां में कौन है ऐसा जिसे कोई ग़म न हो,

    खुशी अरु ग़म में अनुपात बहुत कम,यह समझ लेना तुम॥

  7. Aapka blog pasan Aaya .subhakamana..mere blog par Aapko Aaneka nyota detahu. http://palji.wordpress.com

  8. सभी को इक दिन यमराज का मेहमां बनना है,

    कभी न भरना अमरता का दम,यह समझ लेना तुम॥ god may give us strength to understand


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