१- मेघ सैलानी
तरल वाष्प भरे
हवा में डोले |
२- ढीठ समीर
मनचला -सा बहे
आँचल उड़े |
३- धरती प्यासी
चातक की उदासी
दो नैना भरे|
४- अँखियाँ भरी
चपला जगमग
पत्र बांचती |
५- स्मृति के पत्ते
झर- झर -झरते
जीवन रीते |
६ – नदी का ज्वार
ज्यौं यौवन उद्याम
उमड़ पड़े |
७- मुस्कान उगे
कोई हो ऐसी बात
उदासी हरे |
८- सत्य कसैला
मनमोहक झूठ
बाजी ले लूट |
९- पूरनमासी
मचलती लहरें
छूने चाँद को |
१०- खाने के और
दिखाते कुछ और
ऐसे भी योगी |
११- पावस ऋतु
सतरंगी कंगन
धरा पहने |
डा. रमा द्विवेदी
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आद रमा जी ,
‘सरस्वती-सुमन’ पत्रिका के लिए अपनी १०,१२ क्षणिकायें भेजिए संक्षिप्त परिचय और छाया चित्र के साथ ….
आदरणीय रमा जी ,
आपको पढ़ना सदा सुखद होता है | बहुत अच्छे हाइकु हैं ………तरल वाष्प भरे .बिल्कुल नया प्रयोग |
स्मृति के पत्ते ……….वाह क्या कहने …….सुंदर और अनोखा ढंग बात कहने का ! अति सुंदर हाइकु !
मैंने आपके ब्लॉग का लिंक अपने ब्लॉग शब्दों का उजाला पर लगा लिया ताकि जब-जब भी आप पोस्ट लगाएँ मैं पढ़ने का वादा तो नहीं करती .हाँ कोशिश जरुर करुँगी .क्योंकि कोशिशें ही कामयाब हुआ करती हैं !
हरदीप
प्रिय हरदीप जी ,
आप जैसे पारखी यदि शब्द मोती मेरे ब्लॉग में बिखेर जाते हैं तो मैं अपना सौभाग्य मानती हूँ ..और मुझे रचनाधर्मिता की नई स्फूर्ति और ताजगी मिलती है ..
आपने अपने ब्लॉग में मेरे ब्लॉग का लिंक लगाया है इसके लिए बुहत-बहुत हार्दिक आभार …..आप कोशिश ही करिए मुझे विश्वास है कि कोशिश अवश्य कामयाब होगी ..वादे तो अक्सर टूट जाते हैं ….बस अपना स्नेह बनाए रखियेगा … सस्नेह ..
रमा द्विवेदी
आदरणीय हरकीरत जी,
अनुभूति कलश में आपका आगमन सुखद अहसास से भर गया |बहुत-बहुत हार्दिक आभार ! मै शीघ्र ही मेल के द्वारा आपको क्षणिकाएं प्रेषित करूंगी ..यह सूचना देने के लिए पुन: हार्दिक आभार …सादर….
रमा द्विवेदी
धरती प्यासी चातक की उदासी दो नैना भरे|
अँखियाँ भरी चपला जगमग पत्र बांचती |
असीमित भावनाओं को सीमित उपादानो के माध्यम से अभिव्यक्ति के अवसर अत्यंत कुशलता के संग उपलब्ध कराये गए है |
आपकी भावाभिव्यक्ति को सादर नमन
दिव्यांश जी,
बहुत – बहुत हार्दिक आभार …आप जैसे सुधी पाठक ही मेरी लेखनी की शक्ति हैं ….भविष्य में भी स्नेह बनाए रखियेगा ….पुन: आभार ….
ek ke ek behad khubsurat haiku padhne mile, ohh i missed them all till now.they r awesome.