१-हर रिश्ते में
होता है अनुबंध
दर्द-पैबंद |
२- सेंध लगा दी
बाजारीकरण ने
हर रिश्ते में |
३- आत्मा है कैद
कोई पहरा नहीं
उम्र कैद है |
४- जन्म व मृत्यु
शरीर के हैं रूप
आत्मा अमर |
५- अश्कों से बना
समंदर है भरा
नदी क्यों खाली |
६- प्रकृति- बधू
अलसाई -सी उठी
अलस -भोर |
७- समा गई मैं
समंदर- अन्दर
खारा ही रहा |
८- माघ की ठन्ड
ठिठुरता समुद्र
धूप तलाशे |
९- रेशम -डोर
बंधे प्रेम संबंध
मोहक लगें |
१०- बदरा भरे
भर -भर उड़ेले
चातक पिए |
डा. रमा द्विवेदी
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गहरी बात है – कोई पहरा नहीं, उम्र कैद है।
जाने कैसी होती होगी इसकी पैरोल पर रिहाई।
By: Gyandutt Pandey on दिसम्बर 7, 2011
at 9:51 अपराह्न
रमा जी आपके सभी हाइकु भावपूर्ण हैं। इनमें से कोई भी हाइकु किसी से कम नहीं। आप जैसे रचनाकार हिन्दी को केवल हाइकु छन्द ही नहीं वरन् स्तरीय हिन्दी कविता भी दे रहे हैं-
१-हर रिश्ते में
होता है अनुबंध
दर्द-पैबंद |
३- आत्मा है कैद
कोई पहरा नहीं
उम्र कैद है |
५- अश्कों से बना
समंदर है भरा
नदी क्यों खाली |
६- प्रकृति- बधू
अलसाई -सी उठी
अलस -भोर |
७- समा गई मैं
समंदर- अन्दर
खारा ही रहा |
८- माघ की ठन्ड
ठिठुरता समुद्र
धूप तलाशे |-
९- रेशम -डोर
बंधे प्रेम संबंध
मोहक लगें |
१०- बदरा भरे
भर -भर उड़ेले
चातक पिए |
By: सतीशराज पुष्करणा on दिसम्बर 7, 2011
at 11:04 अपराह्न
ज्ञानदत्त जी एवं डा.सतीशराज जी ,
उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार …
ज्ञानदत्त जी यह तो उपरवाला जाने कि पैरोल पर रिहाई होगी या नहीं
By: ramadwivedi on दिसम्बर 8, 2011
at 9:32 पूर्वाह्न
आदरणीय रमा जी ,नमस्कार
हाइकु शैली में जिस दक्षता के संग भावनाओं का समावेश आपके द्वारा किया गया है ,उसकी जितनी प्रशंसा की जाय ,कम होगी | इस अपेक्षाकृत नवीन शैली को अपनी रचना से समृद्धि प्रदान करने के लिये धन्यवाद |
सादर
By: diwyansh on दिसम्बर 11, 2011
at 6:00 अपराह्न
दिव्यांश जी ,
आपकी आत्मीयतापूर्ण टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभारी हूँ …आप सबका स्नेह मुझसे कुछ सारगर्भित लिखवा लेता है वैसे मैं अपने आप को लेखन में विद्यार्थी ही मानती हूँ और सीखने में विश्वास रखती हूँ ….पुन:आभार सहित …
डा. रमा द्विवेदी
By: ramadwivedi on दिसम्बर 11, 2011
at 7:36 अपराह्न
मानवीय भावनाओं को प्रकृति से जोडते हाइकू बहुत सुंदर ।
By: Asha Joglekar on मार्च 20, 2012
at 10:39 पूर्वाह्न
हार्दिक आभार आशा जी ….
By: ramadwivedi on मार्च 21, 2012
at 7:49 पूर्वाह्न