मौन का दर्द- ताँका

११- दीप लघु हूँ
अन्धकार पीता हूँ
प्रकाश देता
स्वयं जलकर भी
खुशियाँ बांटता हूँ |

१२- जानता है जो
जुड़ाव की शक्ति को
पहचानता -
मानता है रिश्तों को
देता अहमियत |

१३- नेह रिश्तों का
डगमगाता नहीं ‘
धूप-छाँव में
तरोताजा रहता
खिलता गुलाब -सा |

१४- कहावत है-
अकेले का रुदन
अच्छा न होता
कंधे का सहारा हो
रोना संगीत बने |

१५- उठा न पाएँ
दुःख का भारी भार
सुख हल्का है
खुश होके उठाएँ
मंद-मंद मुस्काएँ|

१६- मौन का दर्द
समझे नहीं कोई
आँखों की भाषा
पढ़ न पाया कोई
वेदना जब रोई |

१७ – मौन हो तुम
मौन हैं अहसास
समझ ली है
बांच ली है उसने
प्रेम की परिभाषा |

१८- एक लम्हा था
अहसास दे गया
सुकून भरा
जीवन की संतुष्टि
रही न दूजी चाह |

१९- जीने के लिए
खाना -पानी के साथ
प्यार चाहिए
इज़हार चाहिए
मीठी तकरार भी |

२०- अचूक नुस्ख़ा
प्रेम मरहम है
हर दर्द का
आजमा कर देखें
हर घाव भरता |

२१- वर्षा -संगीत
बूंदों की छम-छम
मन को भाए
सतरंगी चूनर
धरती को ओढ़ाए|

डा. रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Published in: on दिसम्बर 18, 2011 at 10:26 अपराह्न  टिप्पणियाँ (8s)  
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8s टिप्पणियाँLeave a comment

  1. रमा जी वैसे तो हमें हाइकू की कोई समझ नहीं…परन्तु आपके शब्दों से रिसते भाव ह्रदय तक जाते हैं…

  2. रमा जी , आपके ताँका दिल -दिमाग दोनों में सन्तुलन बनाकर चलते ऐं। वैसे तो सभी तांका अच्छे हैं ; लेकिन निम्नलिखित बहुत प्रभावशाली है-
    उठा न पाएँ
    दुःख का भारी भार
    सुख हल्का है
    खुश होके उठाएँ
    मंद-मंद मुस्काएँ|

  3. उपेन्द्र जी,
    आप यहाँ पर आए और अपने विचार प्रेषित किए …हार्दिक आभार…

    हिमांशु जी ,
    आप इस विधा के पारखी हैं इसलिए मेरे लिए आपकी टिप्पणी विशेष महत्व रखती है ..हार्दिक आभार ….

  4. अचूक नुस्ख़ा
    प्रेम मरहम है
    हर दर्द का
    आजमा कर देखें
    हर घाव भरता |

    बहुत ही गहन एवं ह्रदयस्पर्शी।

  5. आपकी अभिव्यक्ति विधाओं की अनुबंधता से परे है |जहाँ तक इस रचना का प्रश्न है ,केवल एक ही शब्द दृष्टिगोचर हो रहा है ‘ अदभुत ‘ | यह क्रम चलता रहे और आपकी लेखनी रत्नगर्भा बनी रहे इसी मंगल कामना के संग

    सादर

  6. इंदु जी एवं दिव्यांश जी ,
    आत्मीयता और उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत-बहुत दिल से शुक्रिया….

  7. उठा न पाएँ
    दुःख का भारी भार
    सुख हल्का है
    खुश होके उठाएँ
    मंद-मंद मुस्काएँ|
    प्रत्‍येक शब्‍द दिल में उतरता हुआ … बहुत ही अच्‍छा लिखती हैं आप …आभार इस बेहतरीन प्रस्‍तुति के लिए ।

  8. सदा जी,
    आपके आत्मीय विचारों के लिए हार्दिक आभार एवं `अनुभूति कलश’ आपके प्रथम आगमन पर स्वागत करता है ..स्नेह बनाए रखियेगा …


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