१- बढ़ रही है
तबाही की ही ओर
मानव सोच |
२- स्वर्ण जूते भी
सुरक्षा न दे पाते
बेटियाँ जलें |
३- कैसी ये सोच
पति को फटकार
कुत्ते से प्यार |
४- खुद ही खोजो
कोई न बताएगा
जीने की राह |
५- कौन सुनेगा
वृद्धों की फ़रियाद
क़ानून है क्या ?
डा. रमा द्विवेदी
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