March 2, 2008 at 12:29 pm (सम्मान व पुरस्कार)
अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन एवं श्रीमती सुमन चतुर्वेदी स्मृति ट्र्स्ट(भोपाल) के द्वारा डा. रमा द्विवेदी को ’ श्रीमती सुमन चतुर्वेदी श्रेष्ठ साधना सम्मान-२००७’से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनके काव्य संग्रह’ दे दो आकाश’ के लिये दिया गया है।इस अवसर पर डा. शशि किरण नायक को उनके कहानी संग्रह’ शारदा’ को प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार और द्वितीय राष्ट्रीय पुरस्कार रजनी सिंह (डिबाई) को उनके कहानी संग्रह ’मुडते हुये मोड़’ को प्रदान किया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. मूलाराम जोशी ने की,देश की जानी मानी गज़लकार-गीतकार डा.मधु चतुर्वेदी मुख्य विशिष्ठ अतिथि , डा. सरोज ललवानी विशिष्ठ अतिथि के रूप में मंचासीन थीं ,कार्यक्रम का संचालन संस्था के महा सचिव श्री सतीश चतुर्वेदी जी ने किया। यह आयोजन १७ फरवरी रविवार २००८ को ४३ ग्रीन एवेन्यु,कोलार रोड, रविशंकर नगर ,भोपाल में संपन्न हुआ। इसके पश्चात काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि राजेन्द्र अनुरागी, डा. मूलाराम जोशी ,डा. रामवल्लभ आचार्य,जगदीश किंजलक, जगदीश श्रीवास्तव,डा. राम गोपाल चतुर्वेदी,डा. राज श्री रावत,मीरा अय्यर, डा. सरोज ललवानी,रजनी सिंह(डिबाई) डा. मधु चतुर्वेदी(गज़रौला) डा. देव प्रकाश,डा. आनंद, वनवारी लाल वर्मा, शशिकिरण नायक डा. रमा द्विवेदी (हैदराबाद) श्री सतीश चतुर्वेदी,डा. जयजय राम ’आनंद’, ने विविध विधाओं की रचनाओं का पाठ करके रस से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर क्रान्ति चतुर्वेदी, कृति चतुर्वेदी, अनुभा सिंह आदि ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवायी। कृति चतुर्वेदी के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम समाप्त हुआ।
डा. रमा द्विवेदी
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October 13, 2006 at 4:32 pm (सम्मान व पुरस्कार)
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भारतीय संस्क्रिति निर्माण परिषद एवं रचनात्मक साहित्यिक शैक्षणिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में नामपल्ली स्थित “पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालय के सभागार में विद्यामार्तण्ड एवं राष्ट्रभारती पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का आरंभ मां वीणा पाणि की वंदना एवं वंदे मातरम से हुआ। डा. वसुधा शास्त्री के द्वारा बहुत ही कुशल संचालन किया गया।
यहां जारी एक प्रेस विग्यप्ति के अनुसार इस अवसर पर स्व. श्री बाबूलालजी पाटौदी शैक्षणिक न्यास एवं स्टेट
बैंक आफ हैदरबाद के सौजन्य से एक संगोष्ठी भी आयोजित की गयी, जिसमें प्रो. दिलीप सिंह ने”भारतीय शिक्षा और राष्ट्र्भाषा हिन्दी का वैश्वीकरण” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दीभाषी समाज विश्व के अनेक देशों में फैला है तथा सौ से भी अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी सिखाने के लिए ३वर्ष से लेकर ५ वर्ष तक के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दशक में पत्रकारिता,अनुवाद,इलेक्ट्रानिक मीडिया, बाजारीकरण आदि के विस्तार के साथ-साथ हिन्दी का भी बडी तेजी से विस्तार हुआ है तथा इससे अन्य भारतीय भाषाओं के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बना है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डा.अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. डी रामचंद्रन एवं समारोह के अध्यक्ष डा. वाई.एस. रामक्रिश्न (निदेशक,केन्द्रीय बारानी अनुसंधान संस्थान) वक्ता माधव राव सोलंकी के अलावा विशेष अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ,हैदराबाद प्रखण्ड की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना सिंह ,डा. कनक भूषण ,हिन्दी प्रचार सभा हैदराबाद के न्यासी एम.प्रभू ,अधिवक्ता श्रीक्रिष्ण शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर हिन्दी शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अनेकों शिक्षकों को विद्यामार्तण्ड पुरस्कार से नवाज़ा गया ।जिसमें डा. रमा द्विवेदी के साथ डा. श्यामला,डा.आर.एस.एन.शास्त्री,माधव राव सोलंकी,जे.प्रेम कुमार, एवं श्रीमती सीमा मिश्राको विद्यामार्तण्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।डा. दिलीप सिंह ,डा. देवीदास यश्वंत इंगले, डा.रिषभदेव शर्मा , नंदनम क्रिपाकर, प्रो. डी. रामचंद्रन एवं डा. वाई.एस. रामाक्रिष्ण को शिक्षा शिरोमणि पुरस्कार एवं सी. आर. रामचंद्रन डा. वाई.एन. राव,डा.एम. लक्ष्यमणाचार्य , डा. एन. नारायण रेड्डी, प्रमोद कुश ‘तन्हा’ ,ग्यानेश्वर पिल्लै,डा.जयकरण हीरेकार, डा. मोहन पिल्लै, ,संतराम यादव आदि को राष्ट्रभारती पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में कुछ आयोजकों एवं अतिथियों को भी सम्मानित किया गया जिनके नाम इसप्रकार हैं-हरिप्रसाद, राजकुमार सूबेदार,श्रीमती चारुशीला सूर्यवंशी,जगदीश्चंद्र सूर्यवंशी ,डा जी.वी.वी. एस. कनकभूषणम ,श्रीक्रिष्ण शर्मा, एम. प्रभु और प्रो. डी. रामचंद्रन को भी सम्मानित किया गय। कार्यक्रम के संस्थापक ,आयोजक डा. हरिश्चंद्र विद्यार्थी के धन्यवाद के पश्चात राष्ट्र्गान के साथ समारोह संपन्न हुआ।
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