March 24, 2008 at 5:46 am (हाइकु)
१- मंड़प बैठी,
सरसों गदराई,
धरा सिमटी।
२- लिपटी कहीं,
महकी कहीं और,
रोया था पेड़ ।
३- झूठे वचन,
अर्चनाएं बेकार,
मन में यार।
४- नशा प्यार का,
ममत्व का हनन,
बच्चे अनाथ।
५- प्रेयसी हंसी,
गुलमोहर लाल,
पत्नी उदास ।
६- अकेलापन,
संवेदनाएं बर्फ,
तपस्या भंग ।
डा. रमा द्विवेदी
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April 13, 2007 at 2:25 pm (हाइकु)
१- आधुनिकता
नीलामी रिश्तों की
खुली दुकान।
२- बुरा करम
खुशहाल जीवन
मन का भ्रम ।
३- सुन्दर तन
कनक घट विष
मलिन मन ।
४- स्वारथ वश
मुखौटा याराना का
कटु सच्चाई ।
५- कविता पढ़ी
कछु पल्ले न पड़ी
जनता हंसी ।
६- शादी रचा ली
माडर्न समझौता
खतरे भरी ।
७- कैसी बेढंग
ज़िन्दगी की कहानी
म्रित्यु रंगीन ।
८- जीवन दुखी
मनाते हैं जश्न
म्रित्यु पर्यन्त ।
९- कुंडली मिली
शहनाई की गूंज
करम जली ।
१०- उघड़ा तन
आधुनिक फ़ैशन
यश की सीढ़ी ।
११- बेढ़ंगी बात
बेवजह की हंसी
अजीब बात ।
डा. रमा द्विवेदी
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