क्षणिकाएँ
१- ज़िन्दगी की मंज़िलों के
रास्ते हैं अनगिनत,
शर्त है कि रास्ते,
खुद ही तलाशने पड़ते हैं।
२- एक ही सूरज यहाँ भी,
एक ही सूरज वहाँ भी,
पर, एक साथ हर जगह,
सुबह नहीं होती।
३- अधिकार मांगते हो?
ज़िन्दगी का अंतिम अधिकार,
मृत्यु के हाथ में ही,
सौंपना पड़ता है।
४- ”मृत्यु” सच में अपनी है,
क्योंकि मृत्यु हमें,
ज़िन्दगी जीने का,
एक और,
भरपूर मौका देती है।
१- ज़िन्दगी की मंज़िलों के
रास्ते हैं अनगिनत,
शर्त है कि रास्ते,
खुद ही तलाशने पड़ते हैं।
२- एक ही सूरज यहाँ भी,
एक ही सूरज वहाँ भी,
पर, एक साथ हर जगह,
सुबह नहीं होती।
३- अधिकार मांगते हो?
ज़िन्दगी का अंतिम अधिकार,
मृत्यु के हाथ में ही,
सौंपना पड़ता है।
४- ”मृत्यु” सच में अपनी है,
क्योंकि मृत्यु हमें,
ज़िन्दगी जीने का,
एक और,
भरपूर मौका देती है।
डा. रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved