यही शिकायत है

       ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है,
        न मिल सका हमसफ़र कोई,
        ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।

        ज़िन्दगी की दौड़ में,
        इक पल भी नहीं ठहरता,
        खुद के लिए चुरा सकूं,
        इक पल भी नहीं वो मिलता,
        न बन सका दिलवर कोई…
        ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।

        सांसें विषैली हो गईं,
        हर सांस विष उगलती है,
        रिश्तों की डोर क्षण-क्षण,
        हिम की तरह पिघलती है,
        बन न सका हमदम कोई…
        ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।

        चाही नहीं थी दौलत,
        चाहे न हीरे -मोती,
        इक यार की तमन्ना,
        ख्वाहिश यही थी दिल की,
        न मिल सका वस्ल-ए-यार कोई…
        ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।

        दोस्ती के बीच भी आज,
        न जाने कितने सवाल हैं,
        इक सवाल हल होता नहीं
        फिर सैकडों सवाल हैं,
        बन न सका हमराज़ कोई…
        ज़िन्दगी बस तुझसे यही शिकायत है।

         डा. रमा द्विवेदी

 

 

Published in:  on June 11, 2008 at 5:39 pm Comments (7)
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