Posted by: ramadwivedi | मई 21, 2008

सिसकती ज़िन्दगी

 

                                   

       सर्दियों के दिन थे। कई महींनों से मै घर पर अकेली ही थी क्योंकि पतिदेव किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक वर्ष के लिए अमेरिका गए हुए थे। किन्हीं निजी कारणों से मैं साथ नहीं गई । जनवरी में ठंड के कारण जल्दी उठा भी नहीं जाता था किन्तु मुझे जल्दी मुंह अंधेरे ही  उठने की आदत थी  इसलिए आज भी उठ गई। गर्म चाय का एक प्याला लेकर उसकी चुस्कियां लेती हुई अखबार अभी पढ़ना शुरू ही किया था
 कि दरवाजे की घंटी बजी। मैंने बड़े ही अनमने मन से दरवाजा खोला, सामने सामान लिए कुमारिका खड़ी थी। मैं कुछ संभलती कि वह सामान फेंककर मेरे गले लगकर जोर- जोर से रोने लगी। कोई उसका रोना सुन न ले इसलिए मैंने उसे शीघ्रता से अन्दर लाकर बिठाया और कहा ऐसे कोई घर थोड़े ही छोड़ देता है । उसने रोते हुए अपने चेहरे के खुले  केशों को हटा कर दिखाया, गालों पर मारने के गहरे निशान उभर आए थे पीठ, गले व
 हाथों पर भी नील स्याह निशान पड़ गए थे। मैं सोचने लगी ठीक-ठाक दिखने वाला कोई व्यक्ति इतना क्रूर कैसे हो सकता है? इतनी बेरहमी से कोई मारता-पीटता है क्या? क्या मर्दों की मर्दानगी इसी में निहित है? अभी अभी शादी हुई है ,दोंनो की पहचान भी ठीक से नहीं बन पाई और यह सब? कोई बड़े भी साथ में नहीं हैं जो इनका मार्गदर्शन करें । एक दिन भी बडों के साथ नहीं रहे । यह कैसा जीवन है जहां किसी प्रकार   का न तो अनुशासन है न जिम्मेदारी का अहसास ? देखने में लंबी ,छरहरे बदन की सुन्दर, पढ़ी लिखी ,हंसमुख और मिलनसार पत्नी को पाकर तो कोई भी पति फ़क्र करता । कुमारिका ग्राफिक डिजाइनर थी। छै वर्ष का उसे काम का अनुभव भी था।  इस नए शहर में भी वह नौकरी ढ़ूंढ़ रही थी । मेरा उसका परिचय भी कुल तीन-चार महीने का ही था । किसी नेट के मित्र के द्वारा ही हमारा परिचय हुआ था। वह भी मुशकिल से  हम तीन चार बार   ही मिले होंगे बस । इतने कम परिचय में भी जब मैं इस संकट की घड़ी में  उसे अपने घर रख सकती हूं तब क्या मनमीत में इतनी भी इन्सानियत नहीं कि वो जब उसे ब्याह कर लाया है तब उसका ख्याल रखे या कम से कम मार-पीट तो न करे। मैंने उसे पानी पिलाया और उसे आश्वस्त किया कि यहां पर वह सुरक्षित है। उसे चाय बनाकर दी और जब उसका मन शान्त हुआ तब मैंने उससे पूछा कि अब बताओ,आखिर हुआ क्या था? वह बताना तो
 नहीं चाहती थी लेकिन बताना जरूरी था इसलिए थोड़ी ही बात उसने बताई। पूरी बात तो उसने नहीं बताई या मुझे ही ऐसा लग रहा था कि कहीं कुछ छुपा रही है । शायद दुविधा में थी कि बताए या नहीं । आखिर पति की इज़्ज़त का सवाल जो था । और खुद को भी मेरी नज़रों में गिराना नहीं चाहती थी । एक द्वन्द्व था कि मैं शायद यह न सोचूं कि कैसा परिवार है? या कैसी लड़की है जो अपने पति को संभाल नहीं सकती । या शायद मैं
 कहीं मदद करने से मना न कर दूं तब वो कहां जाएगी? ऐसे ही कई प्रश्न उसके मन को भ्रमित कर रहे थे और वह खुलकर बता नहीं रही थी । मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था सिवाय इसके कि मैं इसका दुख कैसे कम करूं ? लड़कियों के दुख के प्रति मुझे विशेष हमदर्दी और लगाव है इसलिए मैं अकेली होती हुई भी उसकी मदद के लिए तत्पर थी ।
     उसने अपने देवर को जो दिल्ली में रहता था,तुरन्त फोन किया उसे सब पूरी बात बताई उसने तुरन्त अपने माता-पिता को बताया और उन्होंने भी तुरन्त फोन करके पता किया कि कुमारिका कैसी है? मुझसे यह भी कहा कि मैं उसे कुछ खिला-पिला दूं और उसका ख्याल रखूं जब तक वे यहां न पहुंच जाए । मैं यह सब देखकर आश्चर्य चकित थी कि कुमारिका ने अपने माता-पिता को यह सब क्यों नहीं बताया? अक्सर लड़कियां अपना
 दुख दर्द अपने माता-पिता को पहले बताती हैं। मेरे अन्दर उथल-पुथल मच रही थी अत: मौका देखकर मैंने कुमारिका से पूछ ही लिया “तुमने अपने माता-पिता को यह बात बताई”। उसने बड़ी ही सहजता से उत्तर दिया ’नहीं’ ।’मैंने पूछा क्यों? तब उसने उत्तर दिया मैं उन्हें क्यों बताऊं और उन्हें क्यों तकलीफ दूं ? जिसके लड़के की गलती है मुझे पहले उन्हें ही बताना चाहिए । मेरे माता-पिता बहुत वृद्ध हैं,मेरे  पापा सत्तर वर्ष से ऊपर हैं मैं उन्हें अपनी यह सब तकलीफें बताकर परेशान नहीं करना चाहती । मैं खुद इस समस्या को हल करूंगी । उसके इस कथन से मैं बहुत प्रभावित हुई और सोचने लगी कि काश सभी लड़कियों में इतनी दम-खम और समझ होती ? आखिर तक कुमारिका ने अपने माता-पिता या भाई- बहिन किसी को भी इस बात की हवा तक नहीं लगने दी । परिस्थितियों का बड़ी ही हिम्मत से सामना किया । सबसे बड़ी बात यह थी कि  सास-ससुर पर भरोसा रखा । 

      मैंने  फिर पूछा कि ऐसा क्या हो गया कि उसने तुम्हें इतना मारा पीटा?

       तब उसने जो बताया उसे सुनकर मैं भी अवाक रह गई। कुमारिका ने बताना शुरू किया कि अभी हमारी शादी के चार महीने ही हुए है और वह मुझे अब तक पांच बार पीट चुका है।
 मैंने पूछा क्यों?
 तब उसने बताया कि वह रात -रात भर कम्प्युटर में बैठा रहता है।
 मैंने कहा शायद आफिस का काम करता होगा।
 उसने कहा अगर ऐसा होता तो मैं भी कुछ न कहती किन्तु ऐसा नहीं है।
       तब मैंने कहा तब क्या बात है?
       उसने बताना शुरू किया कि वह रात-रात भर ’आर्कुट’ में लड़कियों से बात करता रहता है।
      मैं ने तब कहा ऐसा तुम कैसे जानती हो?
       उसने बताया कि उसे कम्प्युटर की पूरी जानकारी है। जब वह देर रात तक बिस्तर पर नहीं आता तब वह जाकर देखती है तो वह कम्प्युटर पर ही बैठा मिलता है और बातचीत में इतना तल्लीन रहता है कि उसे पता नहीं चलता कि उसके पीछे खड़ी होकर मैं जो वह लिख रहा है मैं पढ़ रही हूं। मैंने उसे जब-जब ऐसा करने के लिए टोका तब-तब उसने मुझे मारा-पीटा यह कहकर कि वह कुछ भी करे मैं उसे कुछ न बोलूं।वह जब बात करता है  तब मेसेजेज को डिलीट करना भूल जाता है। एक दिन जब वह आफिस गया हुआ था तब मैंने मेसेज बाक्स खोलकर देखा तब मुझे पता चला कि एक सप्ताह में वह लगभग दो सौ लड़िकियों  से बात कर चुका है और  उसमें यह भी  बता रहा है कि वह अविवाहित है,ताकि लड़कियां आकर्षित हों और वह उनका साथ  एन्जोय कर सके।
 वेब कैम में एक दूसरे को देखते भी है और तमाम तरह के संकेत भी देते हैं। यह सब पढ़कर  मेरा नारी-मन बार- बार आहत होता है कि मैंने इस आदमी से शादी क्यों की?
       मैंने कहा तुमने तो खुद पसन्द करके इससे शादी की थी और तुम लोग भी तो नेट के जरिए ही मिले थे ना? क्या तुम्हें इस बारे में पहले पता नहीं था? मैंने कहा- हो सकता है शादी से पहले से ही वह यह काम करता रहा हो । तभी गंदी आदत पड़ गई है ।
      उसने कहा कि शादी से पहले वह क्या करता रहा है उससे मुझे कोई मतलब नहीं है लेकिन अब उसे यह सब नहीं करना चाहिए ।
मैंने भी हां में हां मिलाई और कहा उसे ऐसा नहीं करना चाहिए । अपनी नवविवाहिता को समय न देकर नेट में सर्फ़िंग,ब्लागिंग करके लड़कियों को ढ़ूढ़कर कुसमय बात करना बहुत गलत बात है ।
उसने कहा-मैं मानती हूं कि दोस्त बनाना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन सीमाएं तो होनी चाहिए ना?
    मैंने कहा तुम दो ही लोग साथ रहते हो। न सास-ससुर, जेठ- जिठानी ,देवर-देवरानी ,ननद आदि कोई भी तो साथ नहीं रहते कि झगड़े का कोई अन्य वजह हो।
     उसने कहा घर पर तो सिर्फ दो ही लोग है पर कम्प्युटर के द्वारा पूरी दुनिया घर के अन्दर घुस आई है। जिससे आदमी को एक प्रकार का नशा हो गया है वह उसके अन्दर मुंह घुसाए रखना चाहता है । उसे किसी और नशे की जरूरत ही नहीं है कम्प्युटर में हर चीज़ देखने सुनने को मिलती है और अगर चाहत और बढ़ी तो तै करके बाहर जाकर मिल सकते हैं । आपको पता है आजकल लोग चैट के जरिए ही तरह तरह के  दोस्त बनाते हैं और  गलत रास्तों में भटक जाते हैं। नई जेनरेशन  अपना अकेलापन भरने के लिए रात-दिन कम्प्युटर में सर घुसाए रहती है,माता-पिता काम में चले जाते है और बच्चे जब घर में अकेले होते हैं तब गेम के साथ सेक्स,नशे और हारर पिक्चर्स भी देख्ते हैं जिससे उनमें बहुत कम उम्र में सेक्स की उत्तेजना पैदा हो जाती है और वे बलात्कार ,नशा,चोरी,स्मग्लिंग  जैसे अपराध कर बैठते हैं ।
      मैंने उससे कहा-’आर्कुट’ तो अच्छी  साइट है और लोग अपना प्रोफाइल वहां दोस्त बनाने या पुराने दोस्तों को ढ़ूढ़ने के लिए ड़ालते हैं।
उसने कहा-साइट बहुत अच्छा है पर कुछ लोग उसे भी गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं ।
मैंने उससे पूछा , तुम्हें कैसे पता कि वह लड़कियों से फ्लर्ट करता है? क्या यह बात तुम्हें शादी से पहले पता नहीं थी।
 वह बोली मैं यह अच्छी तरह अब जानती हूं कि यह लड़कियों से फ्लर्ट करता है  लेकिन तब मैं क्या जानती थी कि यह ऐसा निकलेगा? मैं शादी से पहले सिर्फ एक बार ही मिली थी वह भी परिवार के सामने। मेरी उमर तीस की हो गई थी और मेरे माता-पिता शादी करने की जल्दी कर रहे थे । मैंने कई लड़के रिजेक्ट कर दिए थे । मेरे पापा बहुत गुस्सेवाले हैं इसलिए मेरे पीछे ही पड़ गए कि शादी करनी ही होगी। तभी मेरी
 मुलाकात नेट पर मनमीत से हुई । बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और हमने तै कर लिया कि शादी कर लेंगे । मैने अपने जीजा जी को बताया कि वे उसके माता-पिता से बात करें । दोंनों परिवार ने खुशी-खुशी इस शादी के लिए हां कर दी। मैंने तो यह सोचकर शादी कर ली कि एक बार तो करनी ही पड़ेगी ,चलो अपनी किस्मत यहीं आजमा लेते हैं  क्योंकि अब तक जो रिश्ते आए थे उनमें यही बेहतर था । मनमीत के पास तब नौकरी भी नहीं  थी } उसकी उम्र भी ज्यादा हो गई थी लेकिन उसने यह सब मुझे बताया था इसलिए मुझे बुरा नहीं लगा मैंने सोचा नौकरी मिल ही जाएगी ।हमारी शादी से एक महीने पहले ही उसे नौकरी मिली। शादी का पूरा खर्च मनमीत के छोटे भाई ने उठाया जो एक साफ्टवेयर कम्पनी में बहुत बड़े पद पर है ।
  आगे कुमारिका ने कहा मैं अब वापस नहीं जाऊंगी। मुझे अब इस आदमी से नफ़रत हो गई है।
       मैंने उसे बहुत समझाया कि ऐसा नहीं कहते । एक बार घर जाओ और  बड़ों के साथ बैठकर बात करो उसके बाद तुम्हें जो निर्णय लेना हो ले सकती हो लेकिन एक बार तुम्हें अवश्य ही जाना चाहिए। उसके माता-पिता का इसमें क्या दोष है?
 किसी तरह कुमारिका मेरी बात मानकर घर चली गई लेकिन यह कहकर कि मैं इसका ढ़ोल पीटकर ही इसे छोड़ूंगी । इसने अपने आप को समझ क्या रखा है? मैं इतनी आसानी से इसे तलाक नहीं दूंगी ।
 बेचैन दिल कुछ भी कहता है बाद में सब शान्त हो जाता है।
        तीसरे दिन उसके सास-ससुर यहां पहुंचे और अपने बेटे को लेकर स्टेशन से सीधे मेरे घर आए अपनी बहू को लेने के लिए। कुमारिका की सास उसे गले लगाकर बहुत रोई । यह दृश्य देखकर मेरे आंख में भी आंसू आ गए । कोई सास भी बहू के दुख से इतना दुखी हो सकती है यह पहली बार देखा । सास -ससुर अपने बेटे के कृत्य से बड़े शर्मिन्दा थे । सर उठा कर मेरे सामने बात भी नहीं कर सके। बस हाथ जोड़ कर इतना ही कह पाए कि  आपने हमारी इज्जत बचा ली वर्ना पता नहीं क्या हो जाता ?
मैंने कहा कि बच्चों से गलती हो गई है लेकिन दुबारा यह गलती न दोहराएं यह आपको समझाना पड़ेगा । बेहतर यही होगा आप लोग कुछ महीने इन लोंगो के साथ रहे और इनका जीवन सुव्यवस्थित कर दें ।

      कुमारिका चली तो गई माता-पिता के समझाने से मनमीत ने कुमारिका से माफी भी मांग ली और बहुत रोया भी यह कहकर कि एक बार उसे माफ करदे अगर दोबारा गलती हो  तो छोड़कर चली जाए।
      एक दिन मैंने फिर कुमारिका को फोन किया कि कैसी है वह । उसने कहा कि वह ठीक है नौकरी में व्यस्त है। मैंने  उससे पूछा कि मनमीत कैसा है। उसने कहा ठीक है अब कम्प्युटर में ही नहीं बैठता। यह कहकर हंसने लगी। मुझे भी नौकरी मिल गई है इसलिए मैं भी अब नहीं देखती कि वह क्या कर रहा है? मम्मी- पापा भी घर में हैं। अभी तो सब ठीक है ।
मैंने फिर पूछा क्या तुमने उसे माफ कर दिया ? उसने कहा नहीं प्रत्यक्ष तो कुछ नहीं कहती सब नार्मल है लेकिन दिल से उसे माफ नहीं किया। मेरी अन्तरात्मा बहुत आहत हुई है। अब शायद ही यह घाव भर पाए। कुमारिका दिल्ली वापस अपने सास -ससुर के घर चली गई क्योंकि मनमीत अमेरिका नौकरी ढूंढ़ने के लिए चला गया।  आज फिर कुमारिका आनलाइन दिखी । मैंने बात की और कहा मैं उससे बहुत नाराज़ हूं क्योंकि वह
 मुझसे बिना मिले ही चली गई।

   उसने कहा कि उसे मुझसे मिलने में असहजता महसूस होती है  इसलिए क्योंकि मेरी छवि आपके नज़रों में अच्छी नहीं बन सकी ।
    मैंने कहा मैं तो ऐसा नहीं सोचती । कभी-कभी ज़िन्दगी में ऐसा हो जाता है जो हम नहीं चाहते । इसके लिए कोई क्या कर सकता है? इसका मतलब यह भी नहीं होता कि अगला बहुत बुरा है । तुम अपने दिल में यह अपराधभाव मत पालो कि मैं तुम्हारे या मनमीत के बारे में कुछ गलत सोच रही हूं । बस जो गया मैं भी भूल गई हूं तुम भी भूल जाओ । यही सबके लिए अच्छा है ।
   उसने कहा आप ठीक कह रही हैं पर भूलना इतना सरल नहीं होता शायद समय यह घाव भर दे । बस उस  घड़ी का इन्तज़ार है। काश मैं सब कुछ भूल पाती?
    ” मैं सोचने लगी कि अभी तो शादीशुदा ज़िन्दगी के कुछ माह ही गुजरे हैं पूरी ज़िन्दगी कैसे गुजारेंगे? क्या समय मीडिया, टेक्नोलोजी के बढ़ते विकास के दुष्प्रभाव से रिश्ते और अधिक प्रभावित नहीं होंगे? क्या भटकाव के अन्य अनेक रास्ते नहीं खुल जाएंगे? क्या तब भी समय घाव भरने का मरहम बन पाएगा या और तीखे घाव देगा ? समय मरहम तो तब बनेगा जब हमारी सोच परिष्कृत और संतुलित बन सकेगी? अन्यथा कई कुमारिकाएं पति के ज़ुल्म से पीड़ित घुट-घुटकर ज़िन्दगी जिएंगी या आत्महत्या कर लेंगी या फिर तलाक ? नेटचैटिंग क्या -क्या गुल खिलायेगी ? कितने घर टूटेंगे ? दिलों के बीच कितनी दीवारें खड़ी कर देगी”? कुमारिका की शादी टूटने-टूटते इसलिए बच गई कि समय पर उसे मदद मिल गई और सास-ससुर भी समझदार निकले। आजकल नवयुवक व नवयुवतियों के विचार बेलगाम दौड़ते हैं और फिर प्रागाधुनिकता की खाई में गिर जाते हैं । जहां से उबरना आसान नहीं है। यह एक तीव्र प्रभाव छोड़ने वाला व्यसन है।यह भी अन्य मादक नशे से कम नशा देनेवाला नहीं है। इसकी लत लग जाने पर इसका  छूटना नमुमकिन नहीं तो मुश्किल अवश्य है।

कुमारिका के कठोर कदम उठाने से ही विवाह सूत्र टूटने से तो बच गया परन्तु प्रेम के अनुबंध की  नींव हिल अवश्य  गईं ।

     मैंने सोचा वह सच कह रही है शादी टूटने से तो बच गई लेकिन मन में न जाने कितने अन्युत्तरित प्रश्न छोड़ गई। तभी दूरदर्शन  पर समाचार आ रहा था ’आर्कुट वरदान या अभिशाप’। मैंने सोचा यह नेट का नशा कुछ ज्यादा ही लोगों को चढ़ गया है। यहां तक कि  आदमी अपनी जिम्मेदारियां भी भूलने लगा है।
   कुमारिका  बचे खुचे खंड़ित ,सिसकते अरमानों की लाश उठाए जी रही है उसके अन्दर की औरत तो कब की मर चुकी है ???

  लेखिका: डा. रमा द्विवेदी

 
Advertisements

Responses

  1. bas soch raha hun abhi kuch kahne ki sthti me nahi hai.

  2. कुमारिका को मारने वाली बात बहुत ही गलत है किन्तु अलावे उसके, इस तरह के नेट एडिक्ट तो हर जगह मिल जायेंगे जो फाल्स आईडेन्टी से नेट पर खिलवाड़ करते रहते हैं.

    ऑरकुट पर और अन्य चेट की साईट्स पर कितने लोग सही नाम से आते हैम और कितने गलत-यह तो सर्वविदित है.

  3. jane kaise kaise log hoten hain duniya me

  4. aise insan ko chhod dene me hi bhala hai

  5. अनुराग जी,समीर जी, लवली जी एवं विद्रोहिनी जी,

    आप सबका हार्दिक आभार…आपने अपने विचारों से अवगत करवाया अच्छा लगा….

    — डा. रमा द्विवेदी

  6. ।आंखें खोलने वाली कहानी है। कितना बड़ा सत्य हैः
    “माता-पिता काम में चले जाते है और बच्चे जब घर में अकेले होते हैं तब गेम के साथ सेक्स,नशे और हारर पिक्चर्स भी देख्ते हैं जिससे उनमें बहुत कम उम्र में सेक्स की उत्तेजना पैदा हो जाती है और वे बलात्कार ,नशा,चोरी,स्मग्लिंग जैसे अपराध कर बैठते हैं”
    नेट जहां लाभदायक है, दुष्ट-बुद्धि लोग इसका अनुचित उपयोग करके भोले भाले लोगों को गुमराह कर देते हैं।
    कुमारिका यदि आपके पास न आती तो न जाने कितने भयानक परिणाम हो सकते थे। बहुत ही संयत शब्दों में लिखी यह कहानी हर व्यक्ति को अवश्य पढ़नी चाहिए।
    महावीर
    (बहुत दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आने के लिए क्षमा चाहता हूं।)

  7. आदरणीय महावीर जी,

    मेरी इस कहानी को भी आपका आशीष प्राप्त हो गया, बहुत-बहुत हार्दिक आभारी हूं….सादर…

  8. Ek vedanaa purn baat hai.
    Kuchh der socha fir sochana chhod diya ki iska hul kya hai.
    Kya – ek vikasit soch, charitra nirmaan , stree mahatv aadi aadi…?

    Bahut mushkil hai kisee ke vichaar ko badalanaa. Kumarika ke shub bhavishy ke kaamanaa ke sath…

    — Avaneesh

  9. Haardik aabhaar Avneesh jee….naaree jeevan me sawaal adhik zawaab kam hain….yahi sabase badhi dukh ki baat hai:(

  10. Net per sab kuch uplabdh hai , durbhagya yahi hai ki man galat cheejon ki taraf jaldi aakarshit ho jaata hai ..
    Bahut hi sunder shabdon mein samaaj ki ek jwalant samasya ko likha hai aapne..

  11. Respected Dr Sahib
    I am very pleased to read this story so nicely written by you.Dr sahib since ages the evil lies in the minds of man not in machine/technology!with the advent of time methods of vices are changing but the emotional responses are same since ages.In olden times males use to go to nartikis/professional dancers,later trend of reading the lewd literature started,still further TV and latest net has replaced it.Vut lust of evil man remains the same.Question is it is not the technology which is to be blamed it is the basic deviation from ‘sanskars’ which are to be blamed.People still use computer for gaining knowledge and others are also seen as narrated by you.need of the hour is to educate our children for the proper use of new technology.I congratulate you for eye opening story.Regards
    Dr Vishwas Saxena

  12. Dr. Vishwas ji,

    Very much Thank you for precious comments.

    Dr.Rama Dwivedi

  13. dear rama jee
    mujhe aap ki kahani ( sisakti jindagi ) padh ke bahut sukuun mila ..ye kahaani aaj ke samaj kaa aaina hai …aur ….internet ke dushpariram ki taraf ishara karti hai ….ye kahaani hame sochne pe majbur karti hai ki bati ko har haalat me uske paaw pe khada karne ki jaruurat hai …..ek aur baat ………….kumarika ko uska pati chatting se mila tha …..aurat to pyar paa ke dusro ke liye darwaja band kar leti hai . kintu uska pati …………wo to vivaah ke baad bhi dosti ke mansube banaata raha …..iska ek matlab ye bhi hai ki net se prapt rishta sthaayi nahi hota hai … bahut dard hai aap ki iss kahaani me ..aur sawaal ke saath sath jabaab bhi de jaati hai ye kahaani
    samman sahit
    shashi bhushan

  14. शशि जी ,

    आपको कहानी पसंद आई मुझे नई ऊर्जा मिली …भविष्य में भी अपना स्नेह बनाए रखियेगा ….हार्दिक आभार

  15. Dear rama ji aap kekahani bahut ache lage
    .

  16. Kiran Verma ji ,आप का हार्दिक आभार…आपने अपने विचारों से अवगत करवाया अच्छा लगा….


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: