Posted by: ramadwivedi | मार्च 27, 2009

खुदा को मनाने की…..

निगाहें हैं उनमें, कलाएँ भी उनमें,
दिल को लुभाने की अदाएँ भी उनमें ।

किया याद दिल ने जब बुलाने के खातिर,
बहाने बनाने के बहाने हैं उनमें।

कड़ी धूप में जब झुलसता था यह तन,
तपन को बुझाने की घटाएँ हैं उनमें।

तन्हा था यह दिल अब जी न सकेंगे,
हँसकर हँसाने की हँसिकाएँ हैं उनमें।

मौत से लड़ रही थी जब यह ज़िन्दगी,
खुदा को मनाने की सदाएँ हैं उनमें।

डा.रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Advertisements

Responses

  1. तन्हा था यह दिल अब जी न सकेंगे,
    हँसकर हँसाने की हँसिकाएँ हैं उनमें।
    waah bahut sunder

  2. मौत से लड़ रही थी जब यह ज़िन्दगी,
    खुदा को मनाने की सदाएँ हैं उनमें

    अच्छी लगी |

  3. Respected Dr Sahib
    I liked the narration and varied contrasts given in your verses.
    Dr vishwas saxena


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: