Posted by: ramadwivedi | अप्रैल 7, 2009

सरल सा समर्पण

नहीं भाया उनको मेरा मुस्कराना।
दिया आंसुओं का मुझे नज़राना॥

सरल सा समर्पण नहीं भाया उनको,
बनाया है मुझको हँसी का तराना।

नहीं मांगे हमने कभी चाँद-तारे,
दिया एक दिल ना हुए यूँ बेगाना।

चाहत हमारी ना कुछ काम आई,
सीखा उन्होंने बस सितम हम पे ढ़ाना।

दिया सब लुटा बेवफ़ाई पे उनकी,
नहीं आया हमको शम्मा सा जलाना।

डा.रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

Advertisements

Responses

  1. “बनाया है मुझको हँसी का तराना।”

    अरे नहीं रमा जी, हम ने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था:)

  2. चाहत हमारी ना कुछ काम आई,
    सीखा उन्होंने बस सितम हम पे ढ़ाना।

    दिया सब लुटा बेवफ़ाई पे उनकी,
    नहीं आया हमको शम्मा सा जलाना।
    waah bahut khub

  3. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

  4. सरल सा समर्पण नहीं भाया उनको,
    बनाया है मुझको हँसी का तराना।

    sabse acchi line…

    (waise poori nazm acchi hai)

  5. बहुत खूब …

  6. respected dr sahib
    It is good to read you poems bearing simple yet very deep messages.I am sure you can start a reformative era in this value crisis ridden world.But I have a request for you that please dont leave your poems at diagnostic stage only and make them threpautic also i.e. suggest some solutions also in your poetry.कविता को निदानात्मक बना कर न छोडें इसे उपचारात्मक बनाएं i am sure for a poet of your caliber it is not veri difficult.Best Regards
    Dr Vishwas Saxena
    09414550982

  7. डा. विश्वास जी,

    प्रथम तो अनुभूति कलश में आपका स्वागत है। आपने मेरी रचनाओं पर अपने अमूल्य सुझाव प्रेषित किए इसके लिए हृदय से आभारी हूँ । आपके सुझाव बहुत अच्छे हैं लेकिन मैं इतना ही कहना चाहूँगी कि मर्ज़ तो एक ही होता है और उपचार अलग-अलग रोगी के अनुसार हो सकते हैं जिन्हें काव्य में बता पाना असंभव नहीं तो मुश्किल अवश्य है।फिर भी मैं कोशिश करूँगी कि कविता नकारात्मक न हो। लेकिन कवि तो जो अनुभव करता वही लिखता है। समाधान हर बीमार को खुद ढूढ़ना पड़ेगा । आपकी कविता अच्छी लगी ।एक बार पुन: आपका हार्दिक शुक्रिया। अपने विचारों से भविष्य में भी अवगत करवाते रहेंगे इसी कामना के साथ….

    डा.रमा द्विवेदी


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: