Posted by: ramadwivedi | जुलाई 30, 2010

हाइकु-७

१- बंदिनी बनी
सोलह शॄंगार में
ठठरी चढ़ी।

२- मजबूरियाँ
चिता गरीब की
देह कंकाल ।

३- जीवित लाश
परम्पराओं की कैद
प्राण आहुति।

४- ठिठुरी रात
कुत्ता बैठा है पास
आदमी साथ।

५- पूस की रात,
हिम की बरसात,
फ़सल खाक।

डा.रमा द्विवेदी

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Responses

  1. पूस की रात,
    हिम की बरसात,
    फ़सल खाक

    बहुत खूब

  2. ४- ठिठुरी रात
    कुत्ता बैठा है पास
    आदमी साथ।

    ५- पूस की रात,
    हिम की बरसात,
    फ़सल खाक।
    रमा जी आपने बहुत खूबसूरत भाषा में मार्मिक स्थिति का चित्र प्रस्तुत किया है । आपके हाइकु http://hindihaiku.wordpress.com/के लिए भी आमन्त्रित हैं । रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’


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