Posted by: ramadwivedi | जनवरी 2, 2011

माँ की दुआ का साथ तो है

क्या हुआ गर हम अकेले हैं खुदा का साथ तो है,
क्या हुआ गर हम अकेले हैं माँ की दुआ का साथ तो है|
चेतना बन दौड़ता जो रक्त अपनी शिराओं में,
उस पिता की उँगलिओं के स्पर्श का अहसास तो है।

साथ में है सरज़मीं, आबोहवा भी साथ तो है,
साथ में हैं अग्नि-जल,आकाश भी साथ तो है|
साथ में सूरज भी है ,साथ में है चाँद ,तारे,
पंच तत्व से यह निर्मित साँसों का वरदान तो है।

साथ पूजा – अर्चनाएं, वैदिक ऋचाएं साथ तो हैं ,
दीप गंगा में तैराएं, नौ शक्तियां भी साथ तो है
सत्यं -शिवं-सुन्दरं मन्त्र का हम जप करें
दिग-दिगंत में प्रतिध्वनित जो प्रेम का प्रतिभास तो है |

डा. रमा द्विवेदी

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Responses

  1. क्या हुआ गर हम अकेले हैं खुदा का साथ तो है,
    क्या हुआ गर हम अकेले माँ की दुआ का साथ तो है|
    चेतना बन दौड़ता जो रक्त अपनी शिराओं में,
    उस पिता की उँगलिओं के स्पर्श का अहसास तो है
    .
    आप की यह पंक्तियाँ दिल को छु गयीं

  2. एस.एम.मासूम जी,
    प्रथम तो अनुभूति कलश में आपका स्वागत है….उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया…..

    -डा.रमा द्विवेदी

  3. man mugdha kar diya aapki rachna ne, Dr Rama
    wonderful post 🙂
    rajiv
    http://rrajivhind.wordpress.com

  4. Rajiv ji, bahut bahut hardik aabhaar ….aapakaa Anubhuti kalash me aane par swaagat hai….sneh banaye rakhe…saadar….

  5. बहुत उम्दा रचना!!

  6. हार्दिक आभार……समीर जी,


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