Posted by: ramadwivedi | जुलाई 4, 2011

‘दादी-अम्मा’-हाइकु

१- दादी का चश्मा
हमरे मन भाए
चश्मा छुपाए।

२- अम्मा बनाए
रोटी-दाल-चटनी
अमृत लागे।

३- छुपाएं चश्मा
दादी को जो सताएं
दादी चिल्लाए।

४- माला फेरत
हुक्म चलाती दादी
फेरों का फेर?

५- होली- दीवाली
अम्मा-दादी के बिना
लागै है सूनी ।

६- दादी व अम्मा
घर की फुलवारी
लागे है प्यारी ।

७- दादी का प्यार
सबसे अलबेला
पोती के लिए ।

८- अम्मा डाँटती
दादी है दुलारती
अजब लागै ।

९- अम्मा दुलारे
दादी सीख देवे है
बिगारै क्यों है?

१०- नीम की छाँव
दादी- अम्मा का प्यार
कब मिलिहै?

डा. रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

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Responses

  1. सुन्दर रचना रमा जी

  2. मनोज जी,
    हार्दिक आभार रचना पसन्द करने के लिए….

  3. आपके हाइकु पढ़े । आपने इस विधा की गहराई में उतर जो दादी के प्यार से लबालब हाइकु लिखें हैं मुझे मेरी पढ़नानी की याद दिला दी ।दादी के प्यार के रिश्ते को कुछ शब्दों में समेट्कर बड़े सुंदर भावो में बांध दिया है |

    आपको बधाई |

    कभी समय मिले तो यहाँ भी आइएगा ….http://shabdonkaujala.blogspot.com

    सादर

    हरदीप

  4. अरे वाह! ऐसे हाइकु तो पहली बार पढ़े हैं!

  5. हरदीप जी व निशान्त जी,
    उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक आभार…स्नेह बनाए रखियेगा…..

  6. sunder sashakt abhivyakti jo ek dam ayine ki tarah sach bolti hai.

  7. haardik aabhar anamika ji…


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