Posted by: ramadwivedi | अगस्त 19, 2011

औरत है वो

१- टूट-टूट के
नहीं बिखरती जो
औरत है वो |

२- एक संकल्प
जीने की जिजीविषा
औरत है वो |

३- घर -नौकरी
संतुलित रखती
औरत है वो |

४- सुलगती-सी
पडी है ऐशट्रे में
औरत है वो |

५- नहीं समझे
फर्क बीबी -वेश्या में
औरत है वो |

६- देह व आत्मा
दोनों धूं-धूं जलते
औरत है वो |

७- त्रिशंकु बनी
झूलती त्रिकाल में
औरत है वो |

८- दर्द ही दर्द
सहकर जीती जो
औरत है वो |

९- गहरे ज़ख्म
सीने में छुपा लेती
औरत है वो |

१०- उंगली थाम
चलना सिखाती जो
औरत है वो |

११ -नवशिशु को
रक्त से सीचती जो
औरत है वो |

१२- खुद को छोड़
जीती सबके लिए
औरत है वो |

१३- रोज बुनती
सुख के सपने जो
औरत है वो |

१४- मन की इच्छा
बेलती रोटियों में
औरत है वो |

१५- पति -बच्चों में
बंटती टुकड़ो में
औरत है वो |

१६- बना दी जाती
जबरन वेश्या जो
औरत है वो|

१७- ज़िंदा लाश -सा
दफना दिया जाता
औरत है वो |

१८- बेंच देते हैं
पैसों के लिए जिसे
औरत है वो|

१९- बिना मर्जी ही
बना दी जाती साध्वी
औरत है वो |

२० – गिरवी पडी
धड़कने जिसकी
औरत है वो|

डा. रमा द्विवेदी
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Responses

  1. औरत की शक्ति दुख दर्द को वाणी देते सशक्त हाइकु के लिए आपको बधाई !

  2. औरत के अनेकानेक रूपों को बयां करते हाइकु दिल-दिमाग सब को छू गये…

  3. आदरणीय हिमांशु जी ,
    आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार….

    प्रिय इंदु जी,
    आपकी स्नेहिल टिप्पणी के लिए बहुत -बहुत शुक्रिया ..

    डा. रमा द्विवेदी

  4. अद्भुत एवं आत्मा को छू लेने वाली नारी पीड़ा का बड़ा ही सुन्दर चित्रण किया है आपने , अपने शब्दों के कैनवास पर
    परन्तु
    आदि शक्ति , महिसासुर मर्दिनी
    बस औरत है वो
    जीवन साथ निभाए संगिनी
    बस औरत है वो
    गाँधी और सुभाष जने जो
    बस औरत है वो
    शक्ति और सुहास बुने तो
    बस औरत है वो
    विश्व विजय अनुनंदित करती
    ये औरत है वो
    काल कूकाल सुनान्दित करती
    बस औरत है वो

    धृष्टता के लिए छमा प्रार्थी हूँ…..पर आपकी रचना उत्तम है

  5. उपेन्द्र जी,
    `अनुभूति कलश ‘ पर आने के लिए स्वागत है आपका | आप भी परोक्ष रूप से वही कह रहे हैं जो मैंने कहा है ….औरत में बहुत शक्ति है किन्तु परिवेश के चलते या कई अन्य कारणों से हर औरत उस शक्ति का उपयोग नहीं कर पाती और फिर शोषण का शिकार बन जाती है | आप अच्छा लिखते हैं …बधाई व हार्दिक आभार …

  6. मन की इच्छा
    बेलती रोटियों में…

    एकदम अनूठी कल्पना.. अति सुन्दर

  7. मंजु जी ,

    आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार….

  8. Dear Rama jee
    Aurat ke saare ruup , saare dard , uski peera , uske vibhinn ruup , jaise maa , bahin , patni , aur bhi saare rishte , apne dard ko bhitar se bhogti hui kintu baahar se muskraati hui aurat ko padya ( haaiku ) ke maadhyam se darshaya hai ……mera maanna hai ki aap ki iss rachna ki ek ek line aapne aurat ke aansu aur rakt ke mishran se bani syaahi se likha hai
    samman sahit
    shashi bhushan
    753A , Rjendra Nagar Colony ( east )
    ( opposite Mdhur Milan )
    PO- Gorakhnath
    district Gorakhpur- 273015
    uttar pradesh

  9. शशि जी ,
    अनुभूति कलश में आपका स्वागत है ..आपने अपने अमूल्य विचार यहाँ पर प्रेषित किए …बहुत-बहुत दिल से शुक्रिया


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