Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 12, 2011

जल में मीन प्यासी -हाइकु

१- वेदना पाती
वेदना ही मैं गाती
तुम्हें लौटाती |

२- धोखे ही धोखे
जीवन है दूभर
कैसे गुजरे?

३- निर्बल जान
न करो अपमान
वो भी इंसान |

४- मधु मक्खी है
काम मधु बनाना
गुण काटना |

५- उलटवासी
जल में मीन प्यासी
जगत हाँसी |

६ – प्यार व इश्क
अनूठा रसायन
अक्षय घट |

७- चलती रही
जिसने जैसा चाहा
सीखा था माँ से |

८- दर्द कितना ?
हंसते चेहरे में
कोई न देखे ?

९- टूट जाती हूँ
खामोशी से उनकी
डर जाती हूँ |

१०- छोटी -सी पृथ्वी
जनसंख्या अथाह
चाँद की खोज ।

डा. रमा द्विवेदी
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Responses

  1. bahut sundar prastuti rama ji….

  2. ये हाइकु मन को छू गए । हार्दिक बधाई रमा जी ।
    वेदना पाती
    वेदना ही मैं गाती
    तुम्हें लौटाती |

    २- धोखे ही धोखे
    जीवन है दूभर
    कैसे गुजरे?

    टूट जाती हूँ
    खामोशी से उनकी
    डर जाती हूँ |

    खामोशी देख उनकी
    डर जाती हूँ |

  3. उपेन्द्र जी , रचना पसंद करने के लिए शुक्रिया …

    हिमांशु जी ,
    आपने हाइकु पसंद किए उसके लिए बहुत -बहुत हार्दिक आभार …..आपकी और भी अधिक आभारी हूँ जो आपने मेरी गलती सुधार दी मैंने भी ठीक कर दिया है ….आपका पुन: आभार ..बस अपना मार्गदर्शन देते रहिएगा ….सादर ….


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