Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 25, 2011

एक दीपक जलाओ ज़रा- मुक्तक

नेह का एक दीपक जलाओ ज़रा ,
जो गिले-शिकवे उनको भुलाओ ज़रा ,
दूरियां खुद -बा -खुद मिट जाएँगी
प्रेम से मिल गले मुस्कराओ ज़रा |

डा. रमा द्विवेदी
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Responses

  1. आई दीवाली
    जगमग रौशन
    घर आँगन
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !
    हरदीप

  2. दीप पर्व की शुभकामनाएँ


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