Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 11, 2011

माँ कोटि सूर्य आभा -हाइकु

१ – माँ मातु-शक्ति
माँ जीवन दायिनी
माँ सुधा-रस |

२- माँ नैन-ज्योति
माँ कोटि सूर्य आभा
माँ चाँद -तारे |

३- देवो में देव
माँ ब्रह्मा ,विष्णु ,शिव
माँ आदि -शक्ति | |

४- माँ अनमोल
माँ की गोद पालना
सदा झूलना |

५- माँ वर्तिका है
जो खुद जलकर
साथ निभाती |

६- माँ उपासना
माँ ईश आराधना
माँ देह -आत्मा |

७- माँ सरगम
माँ प्रेम-प्रतिभास
माँ अहसास |

    ८- माँ अनुपम
    माँ बिन भटकन
    सूझे न राह |

    ९- महसूसती
    माँ के खाने का स्वाद
    भूख जानती |

    १०- माँ है वजूद
    बिन उसके जीना
    रूह काँपती |

    ११- अतुलनीय
    चौदह भुवन में
    माँ वन्दनीय |

    डा. रमा द्विवेदी

    © All Rights Reserved

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Responses

  1. माँ पर केन्द्रित एक साथ इतने हाइकु, विविध-भाव तरंगों से सजे ! ये हाइकु तो बहुत अच्छे लगे-८- माँ अनुपम
    माँ बिन भटकन
    सूझे न राह |

    ९- महसूसती
    माँ के खाने का स्वाद
    भूख जानती |

  2. उत्तम हाईकु…माँ के इर्द गिर्द रचित कोई भी रचना उम्दा ही होती है..

  3. हिमांशु जी एवं समीर जी ,
    हाइकु पर अपने अमूल्य विचार प्रेषित करने के लिए हार्दिक आभार …..


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