Posted by: ramadwivedi | नवम्बर 22, 2011

अजब बात -हाइकु

१– तेरी छुंअन –
आगोश- अहसास
चिरानंदित|

2- तेरी आरजू
हसरतें अनेक
प्रतीक्षित मैं |

3- साँसों का ताप
पिघलती मोम -सी
रोमांचित हूँ |

४- समझे नहीं
जीवन का रहस्य
ज्ञानी -ध्यानी भी |

५- अजब बात
माँ को न पाल सकें
उसके लाल |

६- झरना झरे
दूधिया आभा लिए
मोहक लगे |

७- पत्ते गिरते
धरा का प्यार पाके
फिर खिलते |

८- आठो पहर
रहूँ तुम्हारे संग
पर निर्लिप्त |

९- बिन बुलाए
मेहमान -सा आता-
चला जाता हूँ |

१०- पगडंडी से
नगर में आ जाना
दंश दे गया |

डा. रमा द्विवेदी

© All Rights Reserved


—Dr. Rama Dwivedi

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Responses

  1. साँसों का ताप
    पिघलती मोम -सी
    रोमांचित हूँ |

    बहुत सुन्दर कल्पना… सांसों के ताप से मोम सा पिघलना और रोमांचित होना … सचमुच अद्भुत !!!

    सादर

    मंजु

  2. मंजु जी,
    बहुत-बहुत हार्दिक शुक्रिया रचना पसंद करने के लिए ….स्नेह बनाए रखियेगा ….


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