Posted by: ramadwivedi | मई 3, 2012

सालती रहीं -हाइकु

१- जीवन -यात्रा
मिलते फूल-कांटे
चलते जाना |

२- खंगालो ज़रा
मन का समंदर
मोती गहरे |

३- मैली चादर
ओढ़ रहा संसार
कबीरा रोए |

४- छूटी न कभी
अतीत की स्मृतियाँ
सालती रहीं |

५- पी-पी के खून
बना एक अजूबा
ताजमहल |

६- बढ़ता जाए
अपेक्षाओं का बोझ
सूझे न राह |

७- मावस रात
कौन दिखाए राह
चन्द्रमा बिना |

८- उजालों में भी
पलते हैं अँधेरे
दीपक तले |

९- दूरियां पले
संवादहीनता में
घटा न छंटे|

१०- आशा का दीप
प्रतिपल जलता
कभी न बुझे |

डा. रमा द्विवेदी

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Responses

  1. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

  2. हार्दिक आभार …..


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