Posted by: ramadwivedi | मई 28, 2012

सी.एम. बनी – हाइकु

१- नोटों की सेज
नींद है बेचैन क्यों
पत्ते सी उडी |

२- पढी -लिखी क्या
अंगूठा छाप भली

सी.एम. बनी |

३- भाग्यवान वो
सोफे पे बैठा है जो
मेम का कुत्ता |

४- काम है कम
सेल पे बात ज्यादा
हम बेदम |

५- आदर्श -झूठे
दीमक लगे रिश्ते
रोज टूटते |

६- देशों का देश
पेंटागन है ध्वस्त
घायल शेर |

डा. रमा द्विवेदी

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Responses

  1. बहुत प्रभावी … कुछ शब्दों में कही गहरी दूर की बात …

  2. बहुत-बहुत हार्दिक आभार रचना पसंद करने के लिए ….


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