Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 1, 2012

हर लम्हे का अहसास-क्षणिकाएँ

१- अलग होकर भी
हम अलग कब होते हैं ?
हमारे बीच हमेशा
पसरा रहता है
एक साथ गुजारे
हर लम्हे का अहसास |

२- रिश्तों में
भौतिक रूप से
अलगाव हो सकता है ,पर
दिल में कोमल भाव
फूलों -सा महकते भी हैं
और त्रासद पल
नासूर की तरह
दहकते भी हैं |

डा. रमा द्विवेदी
© All Rights Reserved

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Responses

  1. आप बहुत कम पंक्तियों में बहुत बड़ी बात कह गई हैं। बधाई!

  2. आ. हिमांशु जी,
    रचना की सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया ….


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