Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 24, 2012

कादम्बिनी क्लब की मासिक गोष्ठी संपन्न


कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार दि.21 अक्टूबर 2012 को हिंदी प्रचार सभा परिसर नामपल्ली में क्लब की 242 वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन हुआ |

क्लब संयोजिका डॉ.अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मूथा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस अवसर पर प्रो.रोहिताश्व (अध्यक्ष), श्रीमती विजयलक्ष्मी काबरा (पू.पार्षद मुख्य अतिथि), डॉ.डंडा लखनवी, डॉ.तुकाराम वर्मा, श्री रामऔतार ‘पंकज’ (विशेष अतिथि लखनऊ) एवं डॉ.अहिल्या मिश्र (क्लब संयोजिका) मंचासीन हुए | डॉ. रमा द्विवेदी द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना से गोष्ठी का आरम्भ हुआ | मीना मूथा ने उपस्थित सभा का स्वागत किया | डॉ.अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में क्लब की संक्षिप्त जानकारी देते हुए कहा कि सन 1994 से निरंतर क्लब साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रसर रहा है | सरिता सुराणा जैन ने लखनऊ से पधारे अतिथियों का परिचय दिया |

प्रथम सत्र में भोपाल से प्रकाशित पत्रिका “समय के साखी” पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ.मदन देवी पोकरणा ने कहा कि आज कल हर जगह नई पत्रिकाओं का विमोचन फैशन सा हो गया है | इस होड़ में जो स्तरीय पत्रिका होगी, वही टिक पाएगी | उन्होंने कहा कि 64 पृष्ठीय इस पत्रिका का सम्पादकीय सटीक है | उन्होंने कहा कि बाजार में सब कुछ पहले जैसे चल रहा है, पर जीवन जीवंत नहीं है | गजल दिल को छू लेती है | इसमें 22 कविताएँ शामिल हैं, जिसमें सभी सजग है | समसामायिक घटनाओं को इसमें चुना गया है | मुद्रण साफसुथरा है और भाषा के मामले में भोपाल जाना ही जाता रहा है | कुलमिलाकर पठनीय पत्रिका है | श्री लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने कहा कि सम्पादक के पास अलग दृष्टिकोण है | किसान की दशा और वर्त्तमान में वह किस दशा में है, इस पर गहरा चिंतन है | गाँव पहले स्वतंत्र ईकाई होता था | आज वह दिल्ली का सेटेलाइट हो गया है | कहानियाँ अच्छी है, चतुष्कोण में बुजुर्गों की समस्या चित्रित है | कुछ काव्यांश भी अग्रवाल ने सुनाए | डॉ.अहिल्या मिश्र ने कहा कि पत्रिका द्वेमासिक है और संपादिका डॉ.आरती है | संपादकीय सशक्त एवं चिंतन पूर्ण है | तायवा, चाँदनी सो गई भावात्मक कहानियाँ हैं | मौलिकता-सृजनशीलता इसमें निहित है | मुखपृष्ट पलटते ही पत्रिका अपनी ओर आकर्षित करती है |

श्रीमती काबरा ने क्लब की निरंतरता के लिए शुभकामनाएँ दीं | लखनऊ से पधारे सभी कवियों ने क्लब की गतिविधियों की सराहना की | प्रो.रोहिताश्व ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदी की सेवा में श्रीराम शर्मा का योगदान सराहनीय है | हिंदी प्रचार सभा की स्मृतियों को प्रस्तुत किया तथा पत्रिका को साधुवाद दिया | तत्पश्चात क्लब के सदस्यों ने मंचासीन अतिथियों का सम्मान किया |

श्री अग्रवाल के संचालन में दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी संपन्न हुई | इसमें भावना पुरोहित, नीरज त्रिपाठी, जुगल बंग जुगल, डॉ.रमा द्विवेदी, संपत देवी मुरारका, मीना मूथा, बलवीर सिंह, भँवरलाल उपाध्याय, विजयलक्ष्मी काबरा, डॉ.डंडा लखनवी, डॉ. तुकाराम वर्मा, रामऔतार ‘पंकज’, डॉ.अहिल्या मिश्र, पवित्रा अग्रवाल, सरिता सुराणा जैन ने समसामायिक काव्यपाठ किया | डॉ. रमा ने क्लब सदस्यों को उनके जन्मदिन-विवाहदिन की बधाई दी | जी.पुष्पलता, भूपेन्द्र आदि भी उपस्थित थे | सरिता सुराणा जैन के धन्यवाद के साथ गोष्ठी का समापन हुआ |

डॉ .रमा द्विवेदी

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