Posted by: ramadwivedi | अक्टूबर 28, 2012

चढ़े न दूजो रंग -हाइकु

1- जितना रोए
घनश्याम रंग में
रंगते गए |

2- डूबी श्याम में
चढ़े न दूजो रंग
मैं – कान्हा संग।

3- बुझती नहीं
प्रेम की कैसी प्यास
श्याम ही जाने ।

4- तकते रहे
श्याम की अंखियो में
मौन -संवाद ।

5- श्याम भक्ति में
रंग लीन्ही चुनरी
दूजो न भावे ।

डॉ . रमा द्विवेदी
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Responses

  1. सभी हाइकु संवेदनशील

  2. रसप्रभा जी , हार्दिक आभार हाइकु पर स्नेहिल प्रतिक्रया देने के लिए


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